(बैतूल) राष्ट्रीय दिव्य दुनिया की खबर के बाद कलेक्टर ने शुरू किया नाईट हाल्ट पर बाकी अफसर पैर पसार कर सो रहे , - असरदार खबर... आदेश के अनुसार सभी विभाग प्रमुखों को भी नाईट हाल्ट करना है अनिवार्य
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। नाईट हाल्ट का आदेश कलेक्ट्रेट कमिश्रर कान्फ्रेंस का था, लेकिन पूर्व कलेक्टर ने कभी भी नाईट हाल्ट नहीं किया? वहीं इस मामले को लेकर 23 अप्रैल को राष्ट्रीय दिव्य दुनिया ने "सीएम के नाईट हाल्ट का आदेश बैतूल के अफसरों ने नकार दिया" शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इस खबर के पहले नए कलेक्टर आईएएस डॉ. सौरभ सोनवाणे की बैतूल में आमद हो चुकी थी। उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और खबर प्रकाशन के अगले दिन ही शाहपुर के फोफल्या में नाईट हाल्ट किया और ग्राम चौपाल लगाई जहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ विस्तार से बातचीत की और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना। क्षेत्र के विकास के लिए उनके सुझाव भी लिये। वैसे महीने में एक ही नाईट हाल्ट करना था, लेकिन संवेदनशील कलेक्टर ने फोफल्या में मिले रिस्पांस को देखते हुए ठीक एक हफ्ते बाद 30 अप्रैल को भैंसदेही क्षेत्र के कुकरू में नाईट हाल्ट कर वहां भी ग्राम चौपाल लगाई और ग्रामीणों से उनका फीडबैक लिया, समस्याओं के बारे में पूछा, योजनाओं की जानकारी ली। युवा आईएएस डॉ. सौरभ सोनवाणे जब से पदस्थ हुए तब से लगातार फील्ड में भी दौरे कर रहे है और सीधे लोगों से मुखातिब हो रहे है। वहीं दूसरी ओर कलेक्टर के नाईट हाल्ट करने के बाद भी अन्य विभाग प्रमुख अभी भी घर में पैर पसारकर सुख की नींद ले रहे है। जबकि कायदे से कलेक्टर कमिश्रर कान्फ्रेंस के अनुसार इन विभाग प्रमुखों को भी महीने में कम से कम एक नाईट हाल्ट करना अनिवार्य है, लेकिन फिलहाल कोई नहीं जा रहा है, जबकि इस दौरान कलेक्टर दो नाईट हाल्ट कर चुके है। जब ऐसी स्थिति में कलेक्टर को ही अधिकारियों के नाईट हाल्ट के लिए रोस्टर जारी करना चाहिए जिससे कि अधिकारी किंतु परंतु की बहानेबाजी कर नाईट हाल्ट से ना बच सके। जिला प्रमुख के साथ-साथ जो ब्लॉक प्रमुख अधिकारी है उनके लिए भी नाईट हाल्ट अनिवार्य है। इसी तरह पुलिस में एसपी और एसडीओपी को भी नाईट हाल्ट करना है।
- इन अधिकारियों को भी नियमित फील्ड विजिट करना अनिवार्य पर जाते ही नहीं...
जो मध्यप्रदेश सरकार की मंशा और जो निर्देश है उसके अनुसार हर विभाग प्रमुख को फील्ड विजिट करना अनिवार्य है, केवल अपने एसी चेम्बर में बैठकर अफसरगिरी करना इन अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है। यह अधिकारी फील्ड में नहीं जाते है और उसका नतीजा यह है कि उन्हें पता ही नहीं रहता कि उनके विभाग में चल क्या रहा है। इसका बड़ा नमूना यह है कि पीएचई के कार्यपालन यंत्री के खिलाफ जिला पंचायत के सदस्यों को निंदा प्रस्ताव लेना पड़ा था । जो अधिकारी फील्ड में नहीं जाते उनमें सहायक आयुक्त, सीएमएचओ, पीएचई ई.ई., पीडब्ल्यूडी ई.ई., जलसंसाधन विभाग के ई.ई., आरईएस के ई.ई. प्रमुख रूप से शामिल है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 04 मई 2026


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