बैतूल। कलेक्टर के निरीक्षण के पहले ही सोसायटी प्रबंधक ने पूरी कलाकारी दिखा दी। यह मामला मांडवी के कल्याण वेयर का हाउस का बताया जा रहा है। कलेक्टर के निरीक्षण के पहले इस वेयर हाउस में प्रबंधक और सर्वेयर ने सांठगांठ कर रेता मिक्स दो ट्राली गेहूं खरीदा था। सूत्र बताते है कि इसका डब्ल्यूएचआर जारी हो गया और इसका स्टेक लग गया था। यदि जांच होती है तो सच्चाई सामने आ जाएगी, लेकिन उम्मीद कम है क्योंकि खरीदी से जुड़े अधिकारियों से प्रबंधक की अच्छी सांठगांठ है। किसानों का कहना है कि जो सरकारी खरीदी चल रही है तो उसमें यदि प्रबंधक और सर्वेयर से सांठगांठ है तो किसी भी तरह का गेहूं हो उसकी खरीदी हो जाती है, लेकिन इसके लिए किसान को खर्च करना पड़ता है। बताया गया कि कल्याण वेयर हाउस मांडवी में जो गेंहू खरीदा गया है उसमें बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। खरीदा गया गेंहू भी सोसायटी में चालाकी के साथ गोदाम में जमा कर रैक लगा दी है। अब ऐसी स्थिति में उसकी जांच होना भी मुश्किल बताया जा रहा है। यह सब इसलिए संभव हो सका कि खरीदी से जुड़े अधिकारियों के साथ सोसायटी प्रबंधक के अच्छे संबंध है और उनका वरदहस्त प्राप्त है। यहां जांच तभी संभव है कलेक्टर स्वयं रूचि ले अन्यथा कुछ नहीं होने वाला। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि यहां पर जो तौल काटा है  उसका खरीदी के पहले नापतौल विभाग से सत्यापन तक नहीं कराया गया इसलिए किसान से अधिक गेहूं तुलवाया लिया जा रहा है? यदि तौल काटे की विधिवत जांच होती है तो यह सच्चाई सामने आ जाएगी। किसानों का कहना है कि चूंकि मंडी में भाव समर्थन मूल्य खरीदी से बहुत कम है। इसलिए किसान ज्यादा से ज्यादा कोशिश कर रहा है कि उसका गेहूं सरकारी खरीदी में बिक जाए और इसका फायदा सोसायटी भरपूर तरीके से उठा रहा है। नान एफएक्यू क्वालिटी को लेकर किसानों ने ही बताया कि क्या कारण है कि अभी तक यहां माल रिजेक्ट ही नहीं हुआ, क्या सभी का गेेहूं एफएक्यू लेबल का है? उनका कहना है यह संभव ही नहीं है। कलर डैमेज के मामले में माना जा सकता है कि छूट है, लेकिन अन्य पैरामीटर में छूट देकर प्रबंधक चांदी काट रहे है। किसानों का कहना है कि खरीदी से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी ही इन समिति प्रबंधकों को संरक्षण देते है और मनमानी करने का मौका देते है इसलिए गेहंू खरीदी में इस तरह की खुली धांधली हो रही है और धरपकड़ भी नहीं हो रही।