(बैतूल) वन अमले के कब्जे से पांंच ट्रेक्टर छुड़ा ले जाने के मामले में दो माह बाद भी एफआईआर नहीं - वन विकास निगम चूनाहजूरी रेंज का यह मामला कर दिया गया रफा-दफा

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। वन विभाग के अधिकारी - कर्मचारियों द्वारा गंभीर अपराध प्रकरणों के मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जाता है! ऐसा ही एक मामला वन विकास निगम के अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा चूनाहजूरी रेंज में किया गया? यहां पर 28 अक्टूबर को वन विकास निगम के अमले ने पांच ट्रेक्टर रेत का अवैध खनन और परिवहन करते हुए पकड़े थे। दोपहर में यह ट्रेक्टर वन विकास निगम के खपड़ावाड़ी नाके पर खड़े करवाए गए और रात 10 बजे यह ट्रेक्टर ट्राली मौके से गायब हो गए? इस अवैध खनन और परिवहन के मामले में वन विकास निगम के रेंजर और अन्य कर्मचारियों ने बकायदा पीओआर फाड़ा है। इसके बावजूद अज्ञात कारणों से इस तरह ट्रेक्टर लापता होने पर एफआईआर दर्ज कराने से बच रहे है? उस समय बीजादेही थाना प्रभारी रवि शाक्य ने कहा था कि उन्हें वन विभाग से सूचना मिली है, इसके बावजूद उन्होंने भी इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है। जबकि उस समय दावा किया था कि एफआईआर दर्ज की जाएगी। वन विकास निगम के आरजीएम ने भी उस वक्त दावा किया था कि विधिवत एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी? अब यह बात समझ से परे है कि तमाम दावों के बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई है ? बताया गया कि रात 10 बजे 25 से 30 लोग झूंड में आए और खड़ी ट्रेक्टर ट्राली छुड़ा ले गए यह एक तरह से शासकीय आधिपत्य में रखी संपत्ति लूटने का मामला है? इतने गंभीर मामले में भी एफआईआर दर्ज ना होना सवालों को जन्म देता है? जिस वक्त यह ट्रेक्टर ट्राली पकड़े गए थे उस समय रेत खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ था। यह रेत मोरंड नदी से खनन और परिवहन की जा रही थी और वन अमले ने रंगे हाथों पकड़ा था, इसके बावजूद ना तो ट्रेक्टर मालिक या संचालक पर कोई कार्रवाई हुई? इस मामले में खास बात यह है कि जो उक्त रेंज के रेंजर है हीरालाल डहेरिया और दिनेश झारिया दोनों का तबादला हो चुका है, लेकिन उन्हें अभी रिलीव नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में पहले उक्त दोनों अधिकारियों से विधिवत कार्रवाई कराई जाना चाहिए, इसके बाद उन्हें रिलीव किया जाना चाहिए। आरोप तो यह लगते है कि पूरे मामले में बड़ा लेन-देन हुआ है?
@साभार : राष्ट्रीय दिव्य दुनिया
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 30 दिसम्बर 2024