बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जिस तरह से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिन्हित 302 नगरीय क्षेत्र की अवैध कालोनियों में सीवर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए है। उसके बाद अब नगरीय निकायों द्वारा इन कालोनियों के नियमितीकरण की चल रही प्रक्रिया में फिर से स्टीमेट बनाए जा रहे है और उसमें एसटीपी को अनिवार्य किया जा रहा है। इसे देखते हुए यह स्पष्ट है कि प्रत्येक कालोनी में एसटीपी लगाई जाना चाहिए, चाहे वह अवैध कालोनी हो या वैद्य कालोनी हो। वर्तमान में जिन 302 अवैध कालोनियों में यह प्रक्रिया हो रही है, वे नगरीय क्षेत्र की है और यह कालोनियाँ दिसम्बर 2018 के पहले की है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में जो अवैध कालोनियाँ है जिनमें अब तक कोई एक्शन नहीं हुआ है या जिन कालोनियों को प्रबंधन में लिया गया अथवा जिन कालोनियों को अब तक प्रबंधन में नहीं लिया गया सभी जगह कायदे से सीवर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक के एन कटारे का कहना है कि जिन अधिकारियों द्वारा इन कालोनियों को विकास की अनुज्ञा दी जाती है और उनके द्वारा इन कालोनियों में एसटीपी लगवाना उनकी जिम्मेदारी है। उनका यह भी कहना है कि कालोनी के लिए टीएनसीपी द्वारा जो अनुमति दी जाती है उसमें भी इसे शामिल किया जाना चाहिए और जो कालोनाईजर एसटीपी नहीं लगवाता उस पर लीगल एक्शन लेना चाहिए। बैतूल शहर से लगे हुए ग्रामीण इलाकों में कम से कम तीन सैकड़ा अवैध और वैध कालोनियां है, लेकिन किसी में भी एसटीपी नहीं है। पिछले तीन वर्ष के दौरान जिन कालोनियों को प्रबंधन में लिया गया या मुक्त किया गया, उनमें भी एसटीपी लगाने को लेकर एसडीएम द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किए गए। ऐसे में एसडीएम द्वारा प्रबंधन मुक्त किया जाना नियमों के विपरीत माना जा रहा है। इस संबंध में एक्सपर्ट का कहना है कि जिन भी कालोनियों को प्रबंधन मुक्त किया गया, उन्हें पुन: प्रबंधन में लिया जाना चाहिए, क्योंकि उनमें एसटीपी ही नहीं लगी है। यह सबस नियम विरूद्ध काम है।

- नदी - नाले के किनारे की कालोनियों में एसटीपी नहीं, जिम्मेदार मौन...
बैतूल शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाके में जो कालोनियां पिछले 10 वर्ष में डेव्हलप हुई है या वर्तमान में जो कालोनियां संचालित हो रही है, उनमें से किसी में भी एसटीपी नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि नदी-नाले के किनारे बनी हुई कालोनियों में भी एसटीपी नहीं लगाई गई है। ऐसी स्थिति में इन कालोनियों का सीवेज वाटर सीधे इन नदी-नालों में जा रहा है जो कि अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा बैतूल शहर सहित बडोरा आदि में जो मल्टी स्टोरी हाऊसिंग कालोनी निर्मित हुई है उनमें भी एसटीपी नहीं लगाई गई है। यह सब जिम्मेदारों की जानकारी में है पर वह मौन है।

- इनका कहना...
- मेरी शिकायत में 302 कालोनियों को लेकर पीसीबी ने नोटिस दिए थे। यह तो हर कालोनी में लगाना है, बैतूल का कोई भी आम नागरिक पीसीबी को शिकायत कर सकता है। इसमें संबधित एसडीएम और नपा सीएमओ की जिम्मेदारी भी तय होगी। 
- राशिद नूर खान, 
एक्टिविस्ट, भोपाल ।
@साभार : राष्ट्रीय दिव्य दुनिया 
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 27 जनवरी 2025