(बैतूल) राजा ठाकुर की समझाइश से घर वापसी करेंगे धर्मांतरित परिवार , - झल्लार थाने के भैंसाघाट में धर्मांतरण के मामले का किया खुलासा, दो को भिजवाया जेल

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा । धर्मांतरण के खिलाफ हमेशा सक्रिय रहने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य राजा ठाकुर की वजह से धर्मांतरण के दो मामलों को खुलासा हुआ है और जिन्होंने धर्मांतरण किया था, उन्होंने अपने मूल सनातन धर्म में वापसी के लिए सहमति भी जताई है। बैतूल जिले में सक्रिय ईसाई मिशनरी द्वारा कराए जा रहे धर्मांतरण को लेकर भाजपा नेता राजा ठाकुर ने चिंता जाहिर करते हुए इन मिशनरी और इसमें कार्यरत लोगों की जांच पड़ताल विस्तृत रूप से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जिन लोगोंं ने पिछले कुछ वर्षों में धर्मांतरण किया है, उन्हें चिन्हित भी किया जाना चाहिए, जिससे इस धर्मांतरण के चक्रव्यूह को तोड़ा जा सकें। उन्होंने बताया कि ग्राम झल्लार के भैंसाघाट में हमलापुर निवासी सायबू पिता गोमा ठाकरे, बैतूलबाजार निवासी रवि पिता आनंदराव तांडिलकर ग्राम में लगातार लोगों से संपर्क कर इसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन दे रहे थे। वे चिक्कू तांडिलकर के यहां पर प्रार्थना सभा आयोजित कर गरीब आदिवासियों को बुलाकर उन्हें हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्ति और फोटो नदी में विसर्जित करने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
जब इस संबंध में स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक राजा ठाकुर को 22 जनवरी को सूचना मिली तो उन्होंने इसकी जानकारी झल्लार थाने को दिलवाई और इसके बाद आरोपी सायबू और रवि को झल्लार थाने लाया गया, जहां उनके खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के सेक्शन 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया और न्यायालय में पेश किया गया। यहां पर एकता मंज के संजय तिवारी द्वारा जमानत पर आपत्ति लगाने पर इन्हें जेल भेजा गया। भैंसाघाट में हो रहे इस धर्मांतरण को रोकने में भाजपा नेता राजा ठाकुर के अलावा आठनेर के दुलीचंद, ठेमागांव के सुखदेव गलफट, सांवलमेंढ़ा के गोकुल पंद्राम, महेन्द्र सिंह, केरपानी के सीताराम चढ़ोकार, भैंसदेही के रामा पानकर, नरेन्द्र मालवीय, गोलू गुलाब सेलकरी, रामा का विशेष योगदान रहा।
उन्होंने बताया कि भैंसाघाट में रूपचंद मौसिक, चिक्कू तांडिलकर, बाला बारस्कर, लक्ष्मण सेलुकर, संतोष सेलुकर, मुमद पांसे, सुभाष सेलुकर धर्मांतरण कर चुके हैं। 28 जनवरी को राजा ठाकुर, रोशन, मोरेश्वर पटेल, केशोराव, शुभम साहू ने भैंसाघाट जाकर धर्मांतरण कर चुके परिवारों से चर्चा की तो बताया गया कि बाला बारस्कर की पत्नी को मिर्गी आती थीं, उसे ठीक करने और बच्चों को नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर धर्मांतरण किया गया। वहीं सुभाष और लक्ष्मण सेलुकर को आर्थिक प्रलोभन दिया गया। समझाइश देने पर यह परिवार वापस सनातन धर्म में आने के लिए तैयार हो गया है। दो परिवार के महाराष्ट्र जाने से संपर्क नहीं हो पाया है।