बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। एक बार फिर बैतूल-हरदा-होशंगाबाद के सांसद और विधायकों के साथ संबंधित जिले के अधिकारी समीक्षा बैठक आयोजित करने वाले है। एसीएस अजीत केशरी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस संभाग स्तरीय बैठक के लिए सुंदर और सुकुन देने वाले आंकड़ों को जुटाया जा रहा है। इस बैठक में जिस पीपीटी के माध्यम से अधिकारी अपने विभाग का प्रस्तुतिकरण करेंगे उसे बनाया जा रहा है। यदि जनप्रतिनिधि आंकड़ों को डी-कोड करना चाहते है तो उन्हें पिछली बैठकों के फोल्डर लेकर अपने साथ लेकर जाना चाहिए और देखना चाहिए कि पिछली बैठकों और वर्तमान बैठक के आंकड़ों में क्या अंतर आया है! दरअसल जो प्रस्तुतिकरण के फोल्डर बनाए जा रहे है उसमें ऐसी योजनाओं और ऐसे कामों को शामिल किया जा रहा है जो आंकड़ों में बेहतर नजर आ रहे हो? इसमें भी यह ध्यान रखा जा रहा है कि आंकड़े मोटे-मोटे हो और उसमें विस्तृतता ना हो। ऐसी स्थिति में जनप्रतिनिधि इस तरह की बैठक और इसमें प्रस्तुत होने वाले आंकड़ों को केवल निहारते रह जाते है। अधिकारी जो बताते है वहीं उन्हें अटल सत्य नजर आता है।

- किताबी दावे और गुलाबी आंकड़ों से बहलाया जाएगा...
जिस तरह से विभागों के फोल्डर में डेटा प्रस्तुत किया जाता है और किया जा रहा है उससे तो साफ नजर आता है कि केवल जो अच्छा दिखे वहीं दिखाया जा रहा है, जैसे मनरेगा में लेबर बजट कितना पूरा हो चुका है यह बताया जा रहा है, लेकिन यह नहीं बताया जा रहा है कि मनरेगा में मजदूरी कितने दिनों में मिलती है, सामग्री का भुगतान कितने दिनों में होता है? यह नहीं बताते कि कितने कामों की सीसी बाकी है और यह कब-कब के काम है?

- विपक्ष के दावों का दावा हमें तो बुलाए तो सच दिखाए...
अभी तक एसीएस की जितनी भी समीक्षा बैठक हुई किसी में भी संभाग के विपक्ष के विधायकों को नहीं बुलाया गया है। तीनों जिलों में हरदा से रामकिशोर दोगने और टिमरनी से अभिजीत शाह को कभी भी इस बैठक में नहीं बुलाया गया। उन्होंने इस अवमानना को लेकर विधानसभा में दर्ज करा रखा है। उक्त दोनों विधायकों का कहना है कि सरकार के दबाव में विपक्ष के विधायकों को बुलाते इसलिए नहीं है कि वे इन आंकड़ेबाजी की पोल खोल देंगे।

- बैठक के प्रेस नोट से ऐसा लगता है कि जनप्रतिनिधि कुछ बोलते ही नहीं सब एसीएस करते है...
 इस तरह की बैठक को लेकर जो सरकारी प्रेस नोट जारी होता है, उससे तो यही जाहिर होता है कि बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधि कुछ नहीं बोलते जो कुछ निर्देश देते है, वह एसीएस और कमिश्रर ही देते है। इससे जनप्रतिनिधियों की प्रतिभा को लेकर उनके मतदाताओ में संदेह पैदा होता है।
@साभार : राष्ट्रीय दिव्य दुनिया 
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 29 जनवरी 2025