(बैतूल) तहसीलदारों ने 5 लाख से ज्यादा ऋण पुस्तिका बांट दी पर राशि शासन के खाते में जमा ही नहीं , - ब्रेकिंग न्यूज... महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट से राजस्व विभाग की खुल रही है पोल

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। राजस्व विभाग में कामकाज किस तरह से होता है इसका सबसे शानदार नमूना ऋण पुस्तिका या भू-अधिकार पुस्तिका का मामला है। जिले की 10 तहसीलों में करीब 5 लाख से अधिक ऋण पुस्तिका बांट दी गई, लेकिन इसका पैसा शासन के खाते में जमा ही नहीं कराया गया। यह राशि राजस्व विभाग की वसूली के टारगेट में नजर आती है। कलेक्टर और कमिश्रर सहित पीएस आदि तक इसकी समय-समय पर समीक्षा करते है। इसके बावजूद यह राशि शासन के खाते में जमा नहीं होना कई सवालों को जन्म देता है। एक ऋण पुस्तिका महज 10 रूपए जमा करना है और हालत यह है कि तहसीलदारों द्वारा अपने-अपने तहसील क्षेत्र से यह राशि ही जमा नहीं कराई। यह जमा ना कराए जाने पर महालेखाकार ग्वालियर ने गंभीर आपत्ति ली है। महालेखाकार का कहना है कि इस राशि की वसूली के लिए किसी भी स्तर पर कोई प्रयास ही नहीं किया गया। लेखाकार की इस ऑडिट आपत्ति पर विभाग ने यह कहकर बला टालने का प्रयास किया कि जल्द ही यह राशि जमा करा ली जाएगी, लेकिन राशि जमा नहीं होने का कोई भी ठोस कारण अपने जवाब में नहीं बताया।
- वर्ष 2009-10 से जमा नहीं हुए 49 लाख 93 हजार 920 रूपए...
ऑडिट आपत्ति के अनुसार कार्यालय कलेक्टर जिला बैतूल शाखा भू-अभिलेख द्वारा संधारित भू - अधिकार एवं ऋण पुस्तिका प्राप्ति एवं वितरण पंजी की नमूना जांच में पाया गया कि विभाग द्वारा 2009-10 से लेखा परीक्षा अवधि के अंत तक जिले की कुल 10 तहसीलों को 4 लाख 99 हजार 392 भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिकाओं का वितरण किया गया। जिस पर 10 रूपए प्रति भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका दर से कुल 49 लाख 93 हजार 920 रूपए की राशि वसूली योग्य है।
- 2005 से 2009 तक भी बाकी है 1 लाख 73 हजार रूपए...
मसला सिर्फ यह नहीं कि 2009 से भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका का पैसा जमा नहीं हुआ है। ऑडिट से यह भी सामने आ रहा है कि अक्टूबर 2005 से सितम्बर 2009 तक भी 1 लाख 73 हजार 762 रूपए इस मद के जमा नहीं हुए है। जो महालेखाकार ने आपत्ति ली है उसके अनुसार कहा गया है इसके बावजूद विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं किया जाना पाया गया। कुल मिलाकर 51 लाख 67 हजार 682 रूपए वसूल किए जाने है।
- यह है नियम... भू-राजस्व संहिता के अनुसार भू-स्वामी को देनी होती है राशि...
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 114 (क) अनुसार प्रत्येक भू-स्वामी के लिए यह बाध्यकारी होगा कि वह किसी ग्राम के अपने समस्त खातों के बारे में भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका रखे, जो कि ऐसी फीस जिसे की चुकाए जाने पर तहसीलदार द्वारा दी जावेगी।
@साभार : राष्ट्रीय दिव्य दुनिया
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 01 फ़रवरी 2025