(बैतूल) तहसीलदार बोल रहे कि अभी कोई दूसरा काम नहीं केवल वसूली पर पूरा फोकस , - राष्ट्रीय दिव्य दुनिया में राजस्व वसूली की सच्चाई उजागर होने के बाद देखा जा रहा हडक़ंप

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा।राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को उजागर करते हुए राष्ट्रीय दिव्य दुनिया ने 29 जनवरी को कलेक्ट्रेट से गलत आंकड़े पेश कर आयुक्त सहित शासन को भी किया गया गुमराह शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस समाचार में बताया गया था कि राजस्व वसूली को लेकर किस तरह से आंकड़ों का खेल दिखाया जाता है। यह समाचार प्रकाशित होने के बाद राजस्व विभाग में हडक़ंप देखा जा रहा है और अब राजस्व वसूली के लिए ताबड़तोड़ अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें तहसीलदार कह रहे है कि अभी कोई दूसरा काम नहीं होगा। हमारा तो पूरा फोकस ही वसूली पर है। जिले में राजस्व विभाग को 17 करोड़ की राजस्व वसूली का लक्ष्य है। इसमें से करीब 27 फीसदी वसूली होना सामने आ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि उच्च स्तर पर होने वाली समीक्षा के दौरान वसूली को लेकर जिले से जो आंकड़े पेश किए जाते है, जो वास्तविक नहीं होते है, इस बात का खुलासा महालेखाकार ग्वालियर की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है। यह ऑडिट रिपोर्ट राष्ट्रीय दिव्य दुनिया की खबर से सार्वजनिक होने के बाद अब वसूली को लेकर तहसीलदारों पर पूरा दबाव है और कहा जा रहा है कि अब किसी भी सूरत में एक सूत्रीय अभियान चलाया जाए और वसूली की जाए।
- पट्टन और बैतूल नगर तहसील में 20 फीसदी से भी कम वसूली...
वसूली को लेकर जो डाटा है उसके अनुसार जिले की 10 तहसीलों में से बैतूल नगर तहसील में मात्र 19 फीसदी वसूली ही की गई। वहीं इसके बाद सबसे खराब प्रदर्शन प्रभातपट्टन तहसील का है, जहां मात्र 18 फीसदी वसूली की गई। इसके अलावा आमला तहसील में 23 फीसदी और मुलताई तहसील में 22 फीसदी वसूली की गई। यदि बेहतर वसूली की स्थिति देखी जाए तो 78 फीसदी वसूली भैंसदेही तहसील में दिखाई देती है। वैसे जो डाटा है वह बताता है कि मांग के विरूद्ध 47.06 फीसदी वसूली की गई है। फिर भी ओवर ऑल वसूली 27 फीसदी ही राजस्व विभाग का डेटा फार्मेट जाहिर करता है।
- वर्किंग कल्चर की पोल खोलती है राजस्व वसूली की स्थिति...
जो राजस्व वसूली के आंकड़े है, वह राजस्व विभाग के कामकाज के तरीकों की पोल खोलती है। राजस्व विभाग में कलेक्टर हर महीने राजस्व अधिकारियों की बैठक लेते है, जिसके एजेंडे में राजस्व की वसूली भी शामिल रहती है। समय-समय पर नोटिस वगैरह की कार्रवाई भी होती है, लेकिन इसके बावजूद भी इतने बड़े पैमाने पर राजस्व वसूली ना होना राजस्व विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह है। सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह और विश्वसनीयता पर सवाल महालेखाकार ग्वालियर की वह ऑडिट आपत्ति है, जिसमें कहा गया है कि बैतूल जिले से जो रिपोर्ट भेजी जाती है, उसमें गलत आंकड़े दिए जाते है।
- आग लगने पर कुंआ खोदने वाली कहावत चरितार्थ...
बैतूल के जागरूक नागरिक रवि त्रिपाठी जो कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली से अक्सर अपनी पीड़ा जाहिर करते नजर आते है। उनका कहना है कि अब आग लगने पर कुंआ खोदने का काम हो रहा है, साल भर सोते रहे। जब राष्ट्रीय दिव्य दुनिया में खबर प्रकाशित हुई तो हडक़ंप मचा और भागदौड़ शुरू हुई।
@साभार : राष्ट्रीय दिव्य दुनिया
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 06 फ़रवरी 2025