(बैतूल) उपयोगिता ना रहने से जिले में बचे है दो खच्च्र, 299 गधे और 403 घोड़े-टट्टू , - दुधारू पशु में भी मादा पशु की संख्या ही सर्वाधिक आती है आंकड़ों में नजर

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा।नई राष्ट्रीय पशु संगणना चल रही है और इस बार ऐप के माध्यम से हो रही है, लेकिन पूर्व संगणना के आंकड़े बता रहे है कि कुछ ऐसे भी पालतू पशु है जिनकी उपयोगिता कम होने से उनकी संख्या धीरे-धीरे लगातार कम हो रही है। इसमें बोझ ढोने वाली प्रजाति के पशु प्रमुख रूप से शामिल है। इन पशुओं में खच्चर, गधे और घोड़े-टट्टू प्रमुख रूप से शामिल है। खच्चर तो लापता होने की स्थिति में आ गए है। वहीं गधों की भी संख्या नगण्य बची है। यदि पिछली पशु संगणना के आंकड़ों को टटोला जाए तो यह बात सिद्ध हो जाएगी कि घोड़े और टट्टू भी लगातार कम हुए है। इनके साथ ही बैलों की संख्या भी कम हो रही है। इन सबका सबसे बड़ा कारण यह है कि वर्तमान आधुनिक दौर में बोझ वाहक पशुओं की उपयोगिता वाहनों के कारण बची नहीं है और इन्हें पालना आज के समय में महंगा और बोझ साबित होता है।
- अब गाय के मुकाबले बैल आधे भी नहीं है...
पिछली पशु संगणना के जो आंकड़े है, यदि उन्हें देखा जाए तो गायों की संख्या के मुकाबले जिले में गाय के मुकाबले बैल की संख्या आधी भी नहीं है। जहां जिले में 2 लाख 77 हजार 127 बैल की संख्या बताई जा रही है। वहीं गायों की संख्या 5 लाख 73 हजार 205 है। यदि तुलना की जाए तो यह आधी भी नहीं है।
- भैंसदेही में है सबसे ज्यादा सूअर प्रजाति...
पशु संगणना के पुराने आंकड़ों के अनुसार जिले में सूअर पालन भी होता है, जिसमें सबसे ज्यादा सूअर भैंसदेही में बताई जा रही है। यहां पर मेल और फीमेल दोनों के आंकड़े 1888 बताए जा रहे है। वैसे ओवर ऑल जिले में फीमेल पिग 3454 और मेल पिग की संख्या 2454 बताई जा रही है। यहां भी अंतर नजर आता है।
- भैंस के मुकाबले भी भैंसा की संख्या बहुत की कम...
यदि दुधारू पशु में गाय के बाद भैंस प्रजाति को देखा जाए तो यहां भी फीमेल की संख्या मेल से कही ज्यादा है। जिले में 1 लाख 73 हजार 725 भैंस है। वहीं मात्र 16 हजार 369 भैंसा की संख्या है।
- बकरों के मुकाबले बकरी का ज्यादा नजर आता पालन...
जिले में दुधारू और मांस विक्रय के हिसाब से आंकड़ों को देखा जाए तो बकरी पालन में भी जो स्थिति है, उसमें 2 लाख 33 हजार 219 बकरी बताई जा रही है, वहीं मात्र 4579 बकरे बताए जा रहे है।
- गाय घटी लेकिन भैंस बढ़ी...
पिछली दो संगणना के आंकड़ों को देखा जाए तो जिले में करीब 11 फीसदी गाय कम हुई है। जबकि 19 फीसदी भैंस बढ़ी है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 08 फ़रवरी 2025