बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जिले में प्रशासनिक सिस्टम कैसे काम कर रहा है और हमारे जनप्रतिनिधियों की आवाज में कितना दम है, इसका बड़ा नमूना जिले में खाली पड़े जनपद सीईओ के पद है। इस मामले को लेकर आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने एसीएस की बैठक और प्रभारी मंत्री की बैठक में मुद्दा उठाया था। नवम्बर माह में हुई इस बैठक में डॉ. योगेश पंडाग्रे ने खाली पद जल्द भरे जाने की बात कही थी, लेकिन तीन माह से ज्यादा का समय हो जाने के बाद भी इन पदों को भरे जाने को लेकर किसी स्तर पर कोई प्रक्रिया नहीं हो रही है। ऐसी स्थिति में विभिन्न जनपद पंचायतों के अंतर्गत आने वाली पंचायतों में अतिरिक्त प्रभार से काम चलाया जा रहा है, जिससे पंचायतों के कामकाज की मॉनिटरिंग ठीक तरीके से नहीं हो रही है और इससे भ्रष्टाचार का खतरा बढ़ गया है। वहीं विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में भी लापरवाही का अंदेशा जताया जाता है।

- इस तरह से समझे खाली पद में अतिरिक्त प्रभार का गणित...
1 - जिले में सिर्फ आमला, मुलताई और भैंसदेही में ही फुल टाईमर जनपद सीईओ पदस्थ है। 
2 - आमला जनपद सीईओ को घोड़ाडोंगरी का, मुलताई सीईओ को प्रभातपट्टन का और भैंसदेही सीईओ को आठनेर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
3 - बैतूल जनपद में जिला पंचायत की अकाउंट ऑफिसर के पास अतिरिक्त प्रभार है। 
4 - शाहपुर और भीमपुर जनपद में आरईएस के एई को प्रभार दिया गया है। 
5 - चिचोली में तो कृषि विभाग के आत्मा परियोजना के प्रभारी को ही अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

- अतिरिक्त प्रभार में संभव नहीं नियमित कामकाज संभालना...
1 - अब जैसे आमला और घोड़ाडोंगरी के बीच लगभग 30 किलोमीटर है। ऐसे में कोई जनपद सीईओ कैसे दो जनपद के नियमित कामकाज को देख सकता है।
2 - इसी तरह मुलताई-पट्टन के लगभग 35 किलोमीटर है, वहीं भैंसदेही-आठनेर के मध्य भी इतनी ही दूरी है। ऐसे में एक सीईओ दो जनपद का कामकाज संभाले यह व्यवहारिक नहीं है।
3 - बैतूल जनपद में जिस अधिकारी को चार्ज दिया गया है, उसके पास ट्रेजरी और जिला पंचायत के अकाउंट ऑफिसर का भी चार्ज है, अब तीन भूमिका में कोई कैसे न्याय कर सकता है। 
4 - जब एई के पास ही चार्ज होगा तो निर्माण कार्यो की मॉनिटरिंग पर अपने आप प्रश्र चिन्ह लगता है। 

- कमजोर राजनीति का नतीजा...
 यह जो स्थिति नजर आ रही है यह तब होता है, जब जिले में ताकतवर जनप्रतिनिधि ना हो। अन्यथा इस तरह से लंबे समय से पद खाली हो और पोस्टिंग ना हो तो समझ आता है कि राजधानी में जोर नहीं चल रहा।
- भारत सेन, अधिवक्ता, बैतूल।

- इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है...
इस तरह के अतिरिक्त प्रभार में कार्य गुणवत्ता प्रभावित होती है। मॉनीटरिंग सही तरीके से नहीं होती है। सबसे बड़ी बात है कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। यदि पोस्टिंग नहीं हो रही है तो भी मतलब यह है कि आने वालों का जुगाड़ काम नहीं कर रहा।
- अभिषेक दुबे, अधिवक्ता, बैतूल ।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 09 फ़रवरी 2025