बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। सरकार और कलेक्टर दोनों ही नगरीय क्षेत्र की अवैध कालोनियों को लेकर हमेशा उठक-पठक करते है, लेकिन नगरीय क्षेत्र से लगे ग्रामीण इलाकों की अवैध कालोनियों की अनदेखी होती है।  जबकि इनमें बड़ी संख्या में जो रहवासी है वह मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यदि अकेले बैतूल नपा क्षेत्र से लगी पंचायतों को देखा जाए तो बटामा, बडोरा, हनोतिया, कोसमी, उड़दन, जामठी, मरामझिरी, चिखलार, मलकापुर, सोनाघाटी, बाजपुर आदि में सैकड़ों की संख्या में कालोनियां है। जो नियम कायदे से अवैध की श्रेणी में आती है। इन कालोनियों के मामले में कभी भी देखने में नहीं आया कि सरकार या प्रशासन ने कोई मुहिम चलाई हो जिससे वहां के रहवासियों को मूलभूत सुविधाएं मिले। जनप्रतिनिधियों द्वारा एसीएस की बैठक में अवैध कालोनियों का जो मामला उठाया था, उसमें उन्होंने केवल नगरीय क्षेत्र की अवैध कालोनियों का जिक्र नहीं किया था। बल्कि सभी अवैध कालोनियां की बात कही थी। अवैध कालोनियों को अच्छे से जानने समझने वाले अधिवक्ता भारत सेन का कहना है कि कलेक्टर को चाहिए कि वे सभी एसडीएम को निर्देशित करें और पिछले दस वर्ष में ग्रामीण क्षेत्र में जो कालोनियां बनी है उनका सर्वे कराएं। इस सर्वे से स्पष्ट हो जाएगा कि इन कालोनियों के पास विधि अनुरूप अनुमति है या नहीं। इसमें पूरी तरह से नागरिक सुविधाएं उपलब्ध है या नहीं। यदि सर्वे होगा तो सच आएगा सामने?

- बड़ा सवाल... जो कालोनियां प्रबंधन मुक्त की गई क्या वे नियम कायदे से सही है?
जिले में ग्रामीण क्षेत्र की जिन कालोनियों को विगत 10 वर्ष में प्रबंधन में लिया गया और फिर प्रबंधन मुक्त किया गया, क्या कभी उनके प्रबंधन मुक्त किए गए आदेश की पड़ताल की गई? क्या जिन शर्तो के तहत इन कालोनियों को प्रबंधन मुक्त किया गया था उनका परिपालन हुआ है। ज्यादा नहीं विगत तीन वर्ष में बैतूल शहर के आसपास प्रबंधन कालोनियों का अध्ययन ही बताता है कि इन कालोनियों के मामले में नौकरशाही में क्या कलाकारी की?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 15 फ़रवरी 2025