बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जिले में विभिन्न स्थानों पर बंदरों का डेरा सडक़ों पर ही रहता है। इसके अलावा वे आवासीय इलाके में आकर भी खूब उत्पात मचाते है। कई बार लोगों को जख्मी भी कर देते है। जब इस तरह की स्थिति को लेकर विधायक ने एसीएस की बैठक में मामला उठाया तो बैठक में मौजूद वन विभाग के अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा दिया कि लाल मुंह वालों को हम नहीं पकड़ेगें केवल काले मुंह वाले बंदरों को ही हम पकड़ सकते है, क्योंकि नए नियमों के अनुसार काले मुंह वालों को ही अब वन्यप्राणी माना गया है। वन विभाग के अधिकारी के इस जवाब से बैठक में मौजूद सभी लोग एक दूसरे का मुंह देखने लगे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या सरकार भी बंदरों में रंगभेद करने लगी है।

- ऐसे चर्चा में आया बंदरों का रंग...
आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे और घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा उईके ने उनके विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में बंदरों द्वारा आतंक मचाने और लोगों को जख्मी किए जाने का मामला एसीएस की बैठक में उठाया तो वन अधिकारी ने कहा कि हम लाल मुंह को नहीं पकड़ेगें उन्हें पकडऩे की जवाबदारी नपा और पंचायतों की है। 

- 2022 में अनुसूची से ही हटाया...
इस बैठक में मौजूद वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि वन जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में संशोधन किया गया और संशोधन अधिनियम 2022 में बंदरों को अनुसूची से हटा दिया गया। डीएफओ दक्षिण वन मंडल ने बताया कि लाल मुंह के बंदर को पकडऩे का अधिकार वन विभाग के पास नहीं है। केवल काले मुंह के बंदर ही वन्यप्राणी है।

- बैतूल में यहां है बंदरों का जमघट...
1 - बैतूल-इटारसी मार्ग में बरेठा घाट पर वर्षो से बंदरों का जमघट रहता है। यहां पर लाल और काले दोनों तरह के बंदर मौजूद है।
2 - बैतूल-परासिया मार्ग पर हनुमान डोल के पास बंदरों का सडक़ पर ही डेरा रहता है। 
3 - नांदा रोड पर भी बंदर डेरा डाले रहते है और यहां पर बहुतायात में काले मुंह के है।
4 - लेहदा घाट पर भी बंदरों का डेरा डला रहता है। यहां दोनों तरह के बंदर है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 24 फ़रवरी 2025