बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। अवैध कालोनियों के मामले में यह भी देखने में आ रहा है कि पटवारी अवैध कालोनी का प्रतिवेदन एसडीएम और तहसीलदार को दे देते है, लेकिन इसके बाद वहां से कोई एक्शन ही नहीं होता? कई बार देखने में आता है कि एसडीएम कार्यालय के डायवर्सन आरआई द्वारा बकायदा नोटिस जारी किया जाता है और रजिस्ट्रार से प्लॉट रजिस्ट्री की जानकारी  ली जाती है, लेकिन इसके बाद फाईल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है? यही स्थिति हनोतिया बटामा की अवैध कालोनियों के मामले में सामने आ रहा है। बैतूल-नागपुर फोरलेने पर लक्की ढाबे के पीछे ओमप्रकाश भोले और शेखर राजपूत की टीम द्वारा काटी जा रही अवैध कालोनी के मामले में भी यही सब सामने आ रहा है। उक्त क्षेत्र के पटवारी का दावा है कि उसने तो दो-ढाई माह पहले ही इस अवैध कालोनी को लेकर अपना प्रतिवेदन एसडीएम और तहसीलदार को दे दिया था, आगे क्या हुआ इस संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं है। अब ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी जिम्मेदार एसडीएम कार्यालय के डायवर्सन आरआई राहुल इवने और एसडीएम की है। जब पटवारी ने प्रतिवेदन दे दिया तो अब तक उक्त कालोनी के खिलाफ लीगल एक्शन क्यों नहीं लिया गया। जानकार बताते है कि इस मामले में कई बार मौखिक रूप से शिकायत हुई है, लेकिन इसके बावजूद भी उक्त कालोनाईजरों के खिलाफ किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया गया! आश्चर्यजनक बात यह है कि यहां पर जिन लोगों ने प्लॉट खरीदे है क्या उनका नामांतरण हो गया है, यदि हो गया है तो कैसे हो गया? यदि नहीं हुआ है तो उनके द्वारा कालोनाईजर के खिलाफ कलेक्टर को शिकायत क्यों नहीं की जा रही है? यदि की जा रही है तो अब तक उन शिकायतों में क्या कार्रवाई की गई? जबकि मौके पर किसी भी तरह की कोई नागरिक सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं है? सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर प्लॉटिंग के पहले किसी भी तरह की कोई लीगल अनुमति भी नहीं ली गई है? मामले को लेकर बैतूल कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी और एसडीएम राजीव कहार से कार्रवाई को लेकर चर्चा का प्रयास किया गया, लेकिन उनके मोबाईल पर संपर्क ही नहीं हो पाया।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 26 फ़रवरी 2025