बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। मनरेगा कानून है और इसमें निश्चित समय सीमा में मजदूरी का भुगतान ना होने पर मजदूर को उसका कम्पन्सेशन भी दिया जाता है। सरकार इस कम्पन्सेशन से बचने के लिए जिस मनरेगा पोर्टल पर पूरा मजदूरी और अन्य कामकाज का हिसाब किताब रखती है उसके साथ खेल दिखा रही है। सरकार ने यह व्यवस्था बना दी है कि 7 दिन से अधिक की मजदूरी लंबित नजर नहीं आना चाहिए कि जिससे कि कोई मजदूर डिले कम्पन्सेशन के लिए क्लेम ही नहीं कर सके। वर्तमान में जिले में पिछले ढाई माह से मनरेगा में मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है, लेकिन स्थिति यह है कि एक सप्ताह का ही लंबित दिख रहा है। 

- मस्टररोल कम्पलीट होते ही लंबित मजदूरी दिखना बंद...
जो मनरेगा साफ़्टवेयर है उसमें लंबित मजदूरी पहले दिखाई देती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। जैसे ही मस्टररोल कम्पलीट होता है वैसे ही लंबित मजदूरी पोर्टल पर दिखना बंद हो जाती है। लंबित मजदूरी देखने के लिए मस्टर खोलना पड़ता है।
खाते रहते है खाली केवल एफटीओ को भुगतान मान रहे
मनरेगा में मजदूर के खाते में पैसा नहीं आता, लेकिन पोर्टल पर उसका लंबित भुगतान काउंट नहीं होता। दरअसल सातवें दिन उक्त भुगतान को लेकर जनपद से फंड ट्रांसफर आर्डर जारी होता है, वैसे ही उसे भुगतान मानकर लंबित भुगतान शेष नहीं बताते।
सामग्री भुगतान के बिल नहीं चलता इस तरह का खेल
क्योंकि सामग्री भुगतान में विलंब होने पर भी डिले कम्पन्सेशन का कोई नियम नहीं है। इसलिए यहां पर इस तरह का खेल नहीं होता। यही कारण है कि सामग्री भुगतान की पूरी राशि पोर्टल पर नजर आती है। वर्तमान में तीन महीने से भुगतान नहीं हुआ है। इसलिए सामग्री में करीब 8 करोड़ 85 लाख का भुगतान लंबित दिख रहा है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 04 मार्च 2025