(बैतूल) अतिथि सत्कार का बोझ उठाने वालों की तलाश
बैतूल। शासन प्रशासन के छोटे-बड़े शूरमा आते है, रूकते है, खाते है, पीते है, लेकिन जो सिस्टम बन चुका है, इसमें इन्हें पता रहता है कि जेब में हाथ नहीं डालना है। यह परम्परा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। इस परम्परा में अभी तक बैतूल में इन अनचाहे अतिथियों का सत्कार का खर्च शहर के पटवारियों, आरआई और तहसीलदार के भरोसे होने की चर्चाएं हमेशा रही है, लेकिन अब महंगाई के इस दौर में यह भी हाथ खड़े कर रहे है और इसलिए अब सरकारी मेहमान के सत्कार का खर्च कौन उठाए, यह बात राजस्व हल्के में यक्ष प्रश्र बन चुका है। बताया जा रहा है कि सरकारी आरामगाह के प्रशासनिक इंचार्ज अफसर इस बात को लेकर भारी तनाव में है। वे भी अपना तनाव हल्का करने के लिए कालोनियों के मामले को डील करने वालों पर ही हाथ धर देते है। खैर अतिथि सरकार का कोई फंड ना होना इस ऑफ द रिकार्ड सिस्टम को चला रहा है। जिला मुख्यालय पर सरकारी आरामगाह में मुख्यमंत्रियों से लेकर मंत्री और चीफ सेक्रेटरी अधिकारी से लेकर कमिश्रर स्तर तक के अधिकारी जब दौर पर आते है तो उनके भोजन प्रसादी की व्यवस्था के लिए सरकारी सिस्टम में लीगल तरीके से फंड नहीं दिया जाता।


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