(बैतूल) कम गहराई के बोर खनन कर कम केसिंग डाली पर बिल लगाए अधिक गहराई वाले , - नलजल योजना के बोर सूखने का कारण खनन में भ्रष्टाचार और धांधली

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जैसे-जैसे गर्मी का सीजन करीब आ रहा है तो जल जीवन मिशन की नलजल योजनाओं का स्त्रोत बोर सूखने लगे है। अभी कुछ समय पहले ही एसीएस बैठक की समीक्षा के बाद जनवरी में पीएचई ने बताया था कि करीब तीन दर्जन बोर फेल हो गए है, इसलिए नलजल योजना से पेयजल सप्लाई नहीं हो रही है। इस स्थिति को लेकर एक भू-वैज्ञानिक का कहना है कि यह स्थिति इसलिए बन रही है कि पीएचई ने नलजल योजनाओं में जो बोर कराए उसके लिए वैज्ञानिक तरीके से पानी के स्त्रोत का परीक्षण नहीं करवाया जो कि सरकारी बोर टेंडर में एक अनिवार्य प्रक्रिया होती है। वहीं उनका दावा है कि जो बोर किए गए वह टेंडर में दी गई गहराई से कम किए गए है। इसलिए बोर सूख रहे है। ऐसी स्थिति के बाद आरोप यह लग रहा है कि पीएचई के अधिकारियों ने बोर खनन के मामले में भी धांधली की है। जितनी गहराई के बोर किए जाना था उतनी गहराई के बोर नहीं करवाए। जबकि बिल अधिक गहराई के लगाए गए है और इसमें डाली गई केसिंग के मामले में भी अधिकारियों ने बोर खनन का टेंडर लेने वालों के साथ सांठगांठ कर बोर में कम केसिंग डाली है और बिल अधिक के लगाए है। उनका कहना है कि यदि 547 बोर की किसी एक्सपर्ट टीम से जांच करा ली जाए तो यह सच्चाई सामने आ सकती है। जिस तरह से जनवरी-फरवरी में ही पीएचई के अधिकारी बोर सूखने और नलजल योजनाएं बंद होने की बात कह रहे है उससे साफ है कि बोर खनन में भी पर्याप्त स्तर पर धांधली या भ्रष्टाचार हुआ है जो जांच का विषय है?
- जो बोर सूखे है उनकी गहराई और केसिंग की जांच कराई जाए...
जिला पंचायत के चुने हुए जनप्रतिनिधि का दावा है कि यदि प्रशासन केवल उन बोर की जांच करा ले जिनको लेकर पीएचई ने स्त्रोत सूख जाने का दावा किया है। इन बोर की जांच से स्पष्ट हो जाएगा कि किस गहराई के कराए गए है और कितनी केसिंग डाली है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 29 मार्च 2025