(बैतूल) हॉस्टल में वार्डन के लिए चयन सूची की जारी और दावे आपत्ति के बाद भी जनप्रतिनिधियों को सूचना ही नहीं, - वार्डन के पद को लाभ के पद के रूप में देखा जाता है, इसलिए नियुक्ति में होता है खेल

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जिले में जिला शिक्षा केन्द्र और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा करीब 29 हॉस्टल का संचालन किया जाता है। इनमें 50 सीटर से लेकर 150 सीटर तक हॉस्टल है। यहां पर वार्डन की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसकी कोई खबर किसी जनप्रतिनिधि को नहीं है। बैतूल जिले में इन हॉस्टल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते है और पूर्व में मामले भी सामने आते रहे है, इसलिए यह माना जाता है कि हॉस्टल अधीक्षक का पद मलाईदार पद है! इस पद के लिए हर स्तर पर जोड़तोड़, गुणा-भाग सबकुछ होता है? वर्तमान में जो प्रक्रिया शुरू की गई है, इसको लेकर भी सवाल उठना शुरू हो गए है। वार्डन का चयन किन नियमों के तहत होना चाहिए और इसके लिए गाईड लाईन क्या है, इसको लेकर जनजातीय कार्य विभाग और जिला शिक्षा केन्द्र जारी सूचना में कोई जानकारी नहीं दे रहा है।
- 27 मार्च को चयन सूची जारी 7 दिन में दिया था दावे आपत्ति का मौका...
डीपीसी ने 27 मार्च को चयन सूची जारी कर सभी बीआरसी को यह सूची प्रकाशित करने और इस पर दावे आपत्ति बुलाने के निर्देश दिए थे। जो आदेश जारी किया था, उसमें बताया था कि पात्रता अनुसार वार्डन पद के लिए प्राप्त आवेदनों का जिला स्तरीय जेंडर कोर ग्रुप द्वारा परीक्षण कर चयन सूची भेजी जा रही है।
- अधिकांश को पता ही नहीं कि आवेदन बुलाकर चयन सूची जारी ...
इधर यह जानकारी सामने आ रही है कि इस संबंध में उस हॉस्टल क्षेत्र के जनप्रतिनिधि तो दूर की बात है अधिकांश शिक्षकों को जानकारी ही नहीं है कि कब आवेदन बुलाए गए है और कब चयन सूची जारी हो गई। वहीं दावे आपत्ति का समय निकल जाने के बाद भी अधिकांश को जानकारी नहीं है।
- वार्डन बनने के लिए हर तरह के फार्मूले और जुगाड़ का किया जाता है उपयोग...
जिले में 29 हॉस्टल है और इनका बजट अच्छा खासा होता है, इसलिए हॉस्टल का वार्डन बनना फायदे का सौदा माना जाता है। इन हॉस्टल में किस स्तर पर और किस तरह से बजट को ठिकाने लगाया जाता है और घोटाले किए जाते है इसका उदाहरण शाहपुर का हॉस्टल है! इसलिए वार्डन बनने पूरी ताकत लगाते है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 06 अप्रैल 2025