(बैतूल) पवन गढ़ेकर पर सरकारी जमीन बेचने के मामले में कलेक्टर ने दिए थे एफआईआर के आदेश..! - तात्कालीन पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम जैसे अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से आदेश दबा दिया
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। गौठान क्षेत्र में अवैध कालोनी काटने के साथ-साथ सरकारी जमीन बेचने के मामले में यह सामने आ रहा है कि तात्कालीन कलेक्टर ने इसमें एफआईआर के आदेश दिए थे, लेकिन सुनियोजित तरीके से उस आदेश को दबा दिया गया और आज तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई? जो पूरे मामले के जानकार है उनका दावा है कि इस आदेश को दबाने में हल्के के पटवारी के साथ-साथ तात्कालीन एसडीएम और तहसीलदार की भूमिका है जो जांच का विषय है? बताया गया कि जब अवैध कालोनी का मामला सामने आया और शिकायतें हुई तो तात्कालीन कलेक्टर शशांक मिश्रा ने इस मामले में पटवारी और तहसीलदार से जांच प्रतिवेदन मांगा। सीमांकन करने के बाद पाया गया कि उक्त कालोनाईजर पवन गढ़ेकर ने ना केवल अवैध कालोनी बनाई बल्कि अपने मूल रकबे से ज्यादा जमीन बेच दी! यहां पर नाले की जमीन बेचे जाने मामला सामने आया? लगभग 10 हजार वर्गफुट से ज्यादा की जमीन बेचे जाने की बात कही जा रही है। यदि इस मामले में तात्कालीन कलेक्टर शशांक मिश्रा का एफआईआर दर्ज कराने का आदेश बाहर आता है तो सच्चाई सामने आ जाएगी। कहा जा रहा है कि पवन गढ़ेकर का सगा संबंधी भी राजस्व विभाग में अच्छा खासा दखल रखता है और उसकी वजह से ही यह एफआईआर का आदेश दबा दिया गया। बैतूल से तबादला होकर गए एसडीएम राजीव कहार भी सरकारी जमीन बेचने का यह मामला सामने आने के बाद भी कार्रवाई को लेकर टालमटोल करते नजर आए! उनके इस रवैये को लेकर भी सवाल उठ रहे थे? सबसे बड़ी बात यह है कि यह जमीन नगरपालिका क्षेत्र में है। इसलिए इस मामले में एडीएम को भी सीधे संज्ञान लेना चाहिए और उन्हें खोजबीन कराना चाहिए कि उस समय की जांच रिपोर्ट सीमांकन, प्रतिवेदन और कलेक्टर का आदेश कहां दबा हुआ है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 17 जुलाई 2025


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