बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। लोक निर्माण विभाग को लेकर वहां के ठेकेदारों में एक ही बात की चर्चा होती है कि कोई भी काम ईई मेडम से हो तो बस प्रदीप बाबूजी को साध लो काम सीधा हो जाएगा? यह बात ऐसे ही नहीं कही जाती! इसकी वजह यह है कि प्रदीप यादव नामक उक्त लिपिक के पास विभाग में अकाउंटेंट, ऑडिट और बड़े बाबू का भी काम है?
 ठेकेदार आपसी चर्चा में कहते है कि यह मेडम का ही भरोसा है कि बड़े बाबू रिटायर हुए तो उन्होंने किसी और पर भरोसा नहीं किया! तीसरी जिम्मेदारी भी प्रदीप यादव बाबूजी को दे दी? तमाम ठेकेदार पहले से ही प्रदीप यादव के टेलेंट को बखूबी जानते ही है, लेकिन उन्हें यह भी समझ आ गया है कि विभाग में कोई भी काम सीधा कराना हो तो इधर-उधर जाने की जरूरत नहीं है, सीधे प्रदीप यादव बाबूजी के पास चले जाओ। प्रदीप यादव जी के लिए पहले इंजीनियर अखिलेश कवड़े प्रतिस्पर्धा में हो सकते थे, लेकिन अब उनका तबादला भैंसदेही हो गया है। हालांकि बैतूल डिवीजन के बहुत से मामलों में ठेकेदार अभी भी उनकी मदद ले ही लेते है। 
प्रदीप यादव को लेकर ठेकेदारों से ही चर्चा में यह सामने आया कि पहले वे पीडब्ल्यूडी के अकाउंट देखने के साथ-साथ पीआईयू के अकाउंट भी देखा करते थे, मतलब उनकी काबिलियत का लाभ पहले पीआईयू के ठेकेदार भी ले चुके है! वो तो एसडीओ राकेश सार्वे को ईई का चार्ज मिलने के बाद इनकी अतिरिक्त काबिलियत को और बोझ को देखते हुए राकेश सार्वे ने इन्हें पीआईयू के अकाउंट की जिम्मेदारी से मुक्त कर केवल पीडब्ल्यूडी तक ही सीमित कर दिया। वैसे जो अकाउटेंट होता है वह ऑडिट नहीं कर सकता। यह सामान्य नियम है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 01 अगस्त 2025