(बैतूल) रात के अंधेरे में बनाई जा रही व्हाईट टॉप में बताई जा रही है तकनीकी खामियां , - जिम्मेदार इंजीनियर और एसडीओ निर्माण के समय मौके पर नहीं रहते मौजूद
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल शहर में बन रही व्हाईट टॉप सडक़ को लेकर आरोप लग रहा है कि इसमें कई तकनीकी खामियां है जिसकी वजह से इस सडक़ का भविष्य लंबा नहीं है। वहीं दूसरी ओर इस तरह के निर्माण में लगातार मॉनीटरिंग करने वाले बैतूल विधायक अब प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अधिकांश समय भोपाल में रह रहे है, इसलिए अधिकारी और ठेकेदार की खुली मनमानी चल रही है। अन्य कोई ऐसा जनप्रतिनिधि नहीं है जो निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्वयं मौके पर जाकर देखे? बताया जा रहा है कि व्हाईट टॉप सडक़ की मोटाई 8 इंच होना चाहिए, लेकिन मौके पर जो नजर आ रहा है उसमें कहीं भी 6 इंच से ज्यादा नहीं है। वहीं एम 40 ग्रेड का कांक्रीट उपयोग किया जाना चाहिए जो यहां पर नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा इसमें नियम अनुसार फाईबर मिलाया जाना चाहिए, लेकिन नहीं मिलाया जा रहा है। इसलिए ठेकेदार दिन में सडक़ बनाने की जगह रात के अंधेरे में सडक़ बनाता है? कोठीबाजार में सडक़ का जो पोर्सन बना है उसमें किनारे टूटना शुरू हो गए है। इस आधार पर बैतूल निवासी एक बड़े सडक़ ठेकेदार का दावा है कि क्वालिटी का मटेरियल उपयोग नहीं हो रहा है। वहीं दूसरी ओर इस मामले में पीडब्ल्यूडी की कार्यपालन यंत्री और उनके एसडीओ इंजीनियर भी सडक़ की गुणवत्ता से ज्यादा ठेकेदारों के हितों का ख्याल रखते हुए नजर आ रहे है। कोठीबाजार के सराफा व्यवसायी दीपक सर्राफ का कहना है कि जिस तरह के दावे किए जा रहे थे वैसा कुछ सडक़ में नजर नहीं आ रहा है उन्होंने बताया कि रूड़की आईआईटी में पढ़ाने वाला एक मित्र गत दिनों बैतूल आया था और उसने यह सडक़ देखकर कहा था कि इसमें क्वालिटी का काम नहीं हो रहा है और इसका भविष्य लंबा नहीं है वहीं इसमें उस रूडक़ी के प्रोफेसर ने तकनीकी खामियां बताते हुए कहा था कि यह रोडकांग्रेस के मापदंड के अनुरूप निर्माण नहीं है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 02 अगस्त 2025


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