(बैतूल) कांक्रीट मिक्स डिजाईन में नियम अनुसार लैब से टेस्ट ही नहीं, सडक़ की उम्र पर पड़ेगा असर , - व्हाईट टॉप सडक़ बनाने में तकनीकी मापदंडों को अधिकारियों की मौन स्वीकृति से ताक पर रख रहा ठेकेदार
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल शहर में करोड़ों रूपए की लागत से पीडब्ल्यूडी द्वारा बनवाई जा रही व्हाईट टॉप सडक़ का भविष्य अभी से अंधकार में है? इसमें तकनीकी मापदंड को ताक पर रखा जा रहा है? जिस इंजीनियर या एसडीओ को इस सडक़ की मानीटरिंग करना है वे जानबूझकर अनदेखी कर मौन स्वीकृति देते नजर आ रहे है?
सिविल इंजीनियर अभय सिंह चौहान ने बताया कि वे नियमित आते-जाते सडक़ निर्माण को देख रहे है और उनका मानना है कि कांक्रीट मिक्स डिजाईन में एम-40 ग्रेड में कोई मान्य टेस्ट रिपोर्ट या साईट क्यूब टेस्ट रिपोर्ट का रिकार्ड ही मौके पर उपलब्ध नहीं रहता है! वहीं बिना लैब प्रमाण के कास्टिंग की गई है? जिससे स्टेंथ ही संदिग्ध है। निर्माण कंपनी के प्लांट पर जो रेत उपलब्ध है उसमें मिट्टी की मात्रा बहुत ज्यादा है। वहीं गिट्टी की ग्रेडिंग भी उक्त सडक़ निर्माण के मानक के अनुरूप नहीं है? वहीं सीमेंट की लैब टेस्टिंग रिपोर्ट भी नहीं पाई गई है? यह सब खामियां होने से स्टे्रेक्चर की उम्र अपने आप कम हो जाएगी? शहर के अन्य प्रायवेट सिविल इंजीनियर का भी कहना है कि इस बहुप्रचारित व्हाईट टॉप सडक़ में तकनीकी मापदंडों का खुला उल्लंघन हो रहा है। अब सवाल यह है कि जब ईई प्रभार वाली अधिकारी प्रीति पटेल दावा करती है कि उन्होंने सडक़ निर्माण का निरीक्षण किया है तो क्या उन्होंने इस तरह के जो तकनीकी मापदंड है उसको लेकर सभी तरह की रिपोर्ट आदि का अवलोकन किया? शहर के नागरिकों का कहना है कि यह तमाम रिपोर्ट जिला जनसंपर्क विभाग के माध्यम से सार्वजनिक की जाना चाहिए। जिससे कि आम नागरिक भी सडक़ निर्माण की क्वालिटी का समझ सके।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 06 अगस्त 2025


2025-26 में ED का एक्शन मोड: हजारों रेड, पर कम हुई गिरफ्तारियां
बरगी क्रूज त्रासदी: "हमें भीख नहीं इंसाफ चाहिए", अपनों को खोने वालों का फूटा गुस्सा; अब तक 13 शव बरामद
बरगी बांध हादसा: विमान में खराबी से 4 घंटे एयरपोर्ट पर रुका शव
नए SP अनुराग सुजानिया: किन जिलों में कर चुके हैं सेवा, अब सागर में जिम्मेदारी
नतीजों से पहले सियासी संग्राम, BJP बोली—ममता की हार तय