बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल शहर में बन रही व्हाईट टॉप सडक़ तकनीकी मापदंड के मामले में भी फेल नजर आ रही है। यह बात और है कि जनप्रतिनिधि और आम नागारिकों को तकनीकी ज्ञान ना होने के कारण वे इसे पकड़ नहीं पा रहे है। यहां पर जिस तरह से सडक़ की गु़णवत्ता के साथ समझौता किया जा रहा है उसमें स्पष्ट तौर पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की जिम्मेदारी है जो सडक़ निर्माण करने वाली ठेका कंपनी को स्टीमेट के विपरीत काम करने का मौका दे रहे है और किसी भी तरह की आपत्ति नहीं ले रहे है। बताया जा रहा है कि पीडब्ल्यूडी में यह जिम्मेदारी किसी एसडीओ परमार और इंजीनियर गौर के पास है। दोनों ही सडक़ निर्माण के समय रात के समय भी मौके पर मौजूद नहीं रहते है। वर्तमान में सडक़ निर्माण के मटेरियल में चोरी के आरोप लग रहे है। जो निर्माण से जुड़े एक्सपर्ट है उनका कहना है कि स्टीमेट और ड्राईंग डिजाईन के अनुसार सडक़ की मोटाई 200 एमएम होना चाहिए, लेकिन अब तक जो सडक़ बनी है उसमें कहीं पर 150 एमएम तो कहीं पर 120 एमएम की कास्टिंग किया जाना नजर आता है। यह एक तरह से वित्तीय गड़बड़ी की श्रेणी में आता है। 

- जवाबदेही से बचने के लिए प्रभारी ईई किसी का भी फोन अटेंड नहीं करती...
 बताया जा रहा है कि सडक़ की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर नगरपालिका क्षेत्र के एक जनप्रतिनिधि ने जो कि निर्माण को लेकर अच्छा नॉलेज रखते है उन्होंने प्रभारी ईई प्रीति पटेल को मोबाईल पर संपर्क भी किया, लेकिन उन्होंने ना तो फोन अटेंड किया और ना ही कॉल बैक किया? वहीं बैतूल के मीडिया के अनेक लोगों का कहना है कि इस तरह के निर्माण को लेकर जब प्रभारी कार्यपालन यंत्री से संपर्क किया जाता है तो वे कॉल ही अटेंड नहीं करती, वे इसलिए ऐसा करती है कि जिससे कि जवाबदेही से बचा जा सके?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 08 अगस्त 2025