(बैतूल) क्यूरिंग भी प्रापर नहीं, ज्वाईंट कटिंग और सीलिंग में भी दिख रहा है फाल्ट , - पीडब्ल्यूडी के तकनीकी अधिकारी सडक़ के दिखाई देने वाले दोष को कर रहे है नजर अंदाज
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। पीडब्ल्यूडी द्वारा शहर में बनवाई जा रही व्हाईट टॉप सडक़ का निर्माण रात में किया जा रहा है और इसमें कई तरह की तकनीकी खामी लगातार सामने आ रही है? सिविल इंजीनियर अभय सिंह चौहान का कहना है कि सडक़ निर्माण में जिस स्तर पर क्यूरिंग (तराई) की जाना चाहिए वह भी नहीं की जा रही है? उन्होंने बताया कि कांक्रीट स्लेब के सेट होने के बाद 7 से 14 दिन तक नियमित पानी का छिडक़ाव जरूरी होती है, लेकिन जहां भी अभी तक यह व्हाईट टॉप सडक़ बनी है वहां ऐसा नहीं किया गया है। वर्तमान में बारिश भी नहीं हो रही है और तेज धूप पड़ रही है और स्थिति यह है कि जहां क्यूरिंग की जाना चाहिए वहां जूट के बोरे जरूर डाल दिए गए है, लेकिन नियमित तराई नहीं की जा रही है? इससे कांक्रीट जल्दी सूखने से सडक़ में दरारें आ जाएगी और जो परत है वह कमजोर रह जाएगी जिससे यह सडक़ जल्दी टूटेगी। इसके अलावा उन्होंने ज्वाईंट कटिंग और सीलिंग में भी तकनीकी दोष बताया है। उनका कहना है कि एक्सपेंशन और कंस्ट्रक्शन ज्वाईंट कटिंग समय पर और मानक गहराई और चौड़ाई में नहीं की गई है? एज ट्रीटमेंट भी अधूरा है, इससे स्लैब किनारे से उखडऩे लगा है। उक्त सिविल इंजीनियर का मानना है कि इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी जिम्मेदार है। विशेषकर जो सब इंजीनियर या इंजीनियर इस साईट का प्रभारी है वह पूरी तरह से जिम्मेदार है। गौरतलब रहे कि इस सडक़ की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी एसडीओ परमार और सब इंजनियर गौर की है, लेकिन दोनों ही निर्माण के समय मौजूद नहीं रहते?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 12 अगस्त 2025


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