बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। पांच वर्ष होने जा रहे है लेकिन वन नेशन वन कार्ड वाला फार्मूला हकीकत में लागू नहीं हुआ है? इसका खुलासा बिहार से आए एक परिवार के मामले में हुआ। उक्त परिवार को बैतूल में राशन ही नहीं मिला। जब इस संबंध में पड़ताल की गई तो सामने यह आया कि वन नेशन वन कार्ड जैसा फार्मूला है ही नहीं? वहीं दूसरी ओर यह भी सामने आया कि वन नेशन वन कार्ड के नाम पर सिर्फ यह हो रहा है कि यदि एक ही स्टेट में एक जिले से दूसरे जिले में कोई व्यक्ति जाता है तो वह उस जिले में राशन ले सकता है या फिर कोई व्यक्ति एक ही जिले में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है तो वह उस स्थान पर राशन ले सकता है, लेकिन हकीकत में एक स्टेट से दूसरे स्टेट में आने वाला व्यक्ति राशन नहीं ले सकता! खाद्य आपूर्ति विभाग के पास जो डेटा है वह भी इस बात की पुष्टि करता है कि वन नेशन वन कार्ड का कोई फार्मूला ही हकीकत में लागू नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी को यह पता ही नहीं है कि ऐसा क्यों हो रहा है? अधिकारी तर्क देते है कि अलग-अलग स्टेट की अलग-अलग पॉलिसी भी रहती है, इसलिए एक स्टेट से दूसरे स्टेट में जाने पर बदलाव होता है। इसलिए भी वन  नेशन वन राशन कार्ड का फार्मूला लागू नहीं हो पाता। बैतूल से महाराष्ट्र जाने वाले मजदूरों ने भी बताया कि बैतूल के राशन कार्ड पर उन्हें महाराष्ट्र की राशन दुकानों से नियमित राशन नहीं मिलता है। जबकि सरकार बड़े जोर-शोर से इस बात का प्रचार करती रही है कि कोई भी कहीं भी अपना राशन ले सकता है। 

- जिले में करीब सवा बारह लाख उपभोक्ता लेते है राशन...
बैतूल जिले में करीब दो लाख 31 हजार परिवार के करीब सवा बारह लाख यूनिट को एक रूपए किलो में प्रति यूनिट 5 किलो राशन दिया जाता है। यह राशन उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के तहत दिया जाता है और इसी कानून के तहत 2018 में वन  नेशन वन राशन कार्ड का फार्मूला भी लागू किया गया था।

- करीब 10 हजार ने अन्यत्र लिया है अपना पीडीएस का राशन...
खाद्य विभाग के डेटा के अनुसार एक जिले से दूसरे जिले में या जिले के अंदर ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले लोगों में करीब 10 हजार परिवार या उपभोक्ता ऐसे है जिन्होंने 1 रूपए किलो का पीडीएस का राशन लिया है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 27 अगस्त 2025