(बैतूल) पीडब्ल्यूडी के अफसरों पर दर्ज होना चाहिए पब्लिक न्यूसेंस की एफआईआर.... क्योंकि.... पिछले सीजन में जो अनूठा पेंच वर्क किया था उसकी वजह से सडक़ पर हादसों को जन्म दे रहे बड़े-बड़े गढ्डे उग आए...
(बैतूल) पीडब्ल्यूडी के अफसरों पर दर्ज होना चाहिए पब्लिक न्यूसेंस की एफआईआर....
क्योंकि.... पिछले सीजन में जो अनूठा पेंच वर्क किया था उसकी वजह से सडक़ पर हादसों को जन्म दे रहे बड़े-बड़े गढ्डे उग आए ,
- शहर में मुख्य सडक़ों पर गढ्डों के कारण दुर्घटना में आम नागरिक हो रहे है जख्मी
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। पीडब्ल्यूडी जिसके पास शहर में कुछ सडक़ों की जिम्मेदारी है, वह सडक़ों पर होने वाले गढ्डों का मेंटेनेंस या पेंचवर्क इस तरीके से करवाती है कि यह उपचार ही सडक़ की बर्बादी का कारण बन जाता है। सडक़ पर गढ्डों के कारण जो आम जनता को तकलीफ होती है या दुर्घटनाएं होती है उसको लेकर कायदे से बैतूल एसडीएम को ही जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ पब्लिक न्यूसेंस में एफआईआर दर्ज कराना चाहिए? सडक़ की बर्बादी में अधिकारियां का रोल कैसे रहता है इसका उदाहरण गंज थाने के सामने की सडक़ है। यहां पर गत वर्ष बारिश के बाद 14 सितम्बर 2024 को पीडब्ल्यूडी ने पेंचवर्क कराया था और जो पेंचवर्क किया था इसे सागौन के पत्तों से ढाका भी गया था। इस पेंच वर्क में तकनीकी मापदंड को और रोड कांग्रेस की गाईड लाईन को दरकिनार किया गया था। उसका नतीजा यह है कि इस बारिश के पहले से ही जहां पेंच वर्क कराया गया था वहां पर इतने बड़े-बड़े गढ्डे हो गए है कि आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है? ऐसे ही एक सडक़ दुर्घटना में शिक्षा मिशन के सब इंजीनियर ऋषभ जैन गंभीर रूप से घायल हो गए है और उन्हें उपचार के लिए नागपुर ले जाकर भर्ती कराना पड़ा। सडक़ निर्माण से लेकर पेंच वर्क तक के मामले में पीडब्ल्यूडी या अन्य निर्माण एजेंसियां सामान्य तकनीकी नियम का पालन नहीं करती है। सिविल इंजीनियर अभय सिंह चौहान का कहना है कि कहीं पर भी गढ्डे में पेंचवर्क करना हो तो जहां पर भी गढ्डा होता है वहां पर सडक़ के चारों तरफ से चौकोर कोर कटिंग की जाती है और उस गढ्डे के अंदर पुराना मटेरियल है उसे निकाल लिया जाता है। इसके बाद उसमें नया मटेरियल डालकर उस सडक़ के लेबल से लेबलिंग की जाती है, जिससे कि जो मटेरियल डाला गया है वह स्पेस बनाते हुए सडक़ को दूसरी जगह से तोडऩा शुरू ना कर दे। उन्होंने बताया कि गंज थाने के सामने जो स्थिति बनी है वह इसलिए बनी कि गढ्डे की कोर कटिंग नहीं की गई? उसमें वैसे ही मटेरियल डालकर छोड़ दिया गया। काम्पेक्शन कर लेबलिंग नहीं की गई? अब इस मटेरियल ने इस बारिश में आसपास की सडक़ को तोडऩा शुरू कर दिया। नतीजा यहां बड़े-बड़े गढ्डे बन गए है। अधिवक्ता असीम चौधरी का कहना है कि इस तरह की एजेंसियों के खिलाफ कलेक्टर और एसडीएम को संज्ञान लेकर एफआईआर करना चाहिए?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 31 अगस्त 2025


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