(बैतूल) बरेठा में बल्कर फंसने से लगा महाजाम , पहाड़ी काटकर निकाले गए फंसे वाहन - बैतूल-इटारसी फोरलेन पर बड़े-बड़े गढ्डे भी हादसों का बन रहे कारण
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल - भोपाल फोरलेन बनने के बाद भी इस पर सफर करना किसी आफत से कम नहीं है। दूसरी बार टेंडर में जितेन्द्र सिंह एण्ड कंपनी ने लीपापोती कर फोरलेन तो बना दिया, लेकिन बरेठा में आकर कोर्ट का पेंच फंस गया और आज तक बरेठा घाट में कुछ भी नहीं हो पाया है। इस वजह से आए दिन यहां पर जाम लगना आम बात है।
शनिवार को जो भी मुसाफिर सडक़ परिवहन से बैतूल-भोपाल मार्ग से यात्रा कर रहे थे वे १२ घंटे के महाजाम में फंस गए। जाम लगने की बड़ी वजह यह बताई गई कि सारनी पावर हाउस से राख लेकर जा रहा कंटेनरनुमा बल्कर का लॉक टूट गया और वह मुख्य टर्निंग से ऊपर में जाकर बीच सडक़ में खड़ा हो गया। सुबह साढ़े छ: बजे से लेकर रात ९ बजे तक जाम लग गया। दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लगी हुई थी। जिन्हें वैकल्पिक स्थिति की जानकारी थी वे सारनी रानीपुर होते हुए बैतूल और इटारसी की तरफ गए। वहीं अन्य वाहन तो जो जाम में फंस गए थे वे रात ९ बजे तक नहीं निकल पाए।
ऐसी स्थिति में शाहपुर थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर ने जेसीबी का प्रबंध कर जहां बल्कर खड़ा था उसके बगल की पहाड़ी की कटाई-छटाई करवाई और गिट्टी डलवाकर बगल से वाहन निकलने की व्यवस्था बनाई। वन-वे सिस्टम से वाहन निकाले गए तब जाकर रात ९ बजे यह जाम खुला और यातायात सामान्य हो पाया। बताया गया कि इस जाम में कुछ एम्बुलेंस भी फंसी हुई थी। जिससे मरीजों की जान पर गंभीर खतरा आ गया था।
- एनएचआई एक वर्ष से कर रहा दावा लेकिन बरेठा का नहीं हो रहा उद्धार...
वन्य प्राणी को लेकर हाईकोर्ट में लगी याचिका के कारण पिछले चार वर्ष से बरेठा घाट में कोई निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर पिछले एक वर्ष से एनएचआई अलग-अलग तरह के दावे करता रहा है, लेकिन हकीकत में मैदानी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। ऐसे में एनएचआई के तमाम दावे हवाहवाई लगते है जो केवल हेडलाईन मैनेजमेंट नजर आते है।
- जितेन्द्र सिंह एण्ड कंपनी की लीपापोती अब उधडऩा शुरू...
इटारसी से लेकर बैतूल के मध्य अलग-अलग पेंच में फोरलेन में बड़े-बड़े गढ्डे है। जिस तरह का निर्माण बैतूल-इटारसी फोरलेन बनाने वाली कंपनी जितेन्द्र सिंह एण्ड कंपनी ने किया था उसकी पोल अब पूरी तरह से खुलकर सामने आ रही है।
नवल वर्मा हेडलाइन 01 सितंबर 2025


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