बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा।  बैतूल शहर में बन रही बहुप्रचारित व्हाईट टॉप सडक़ अनुसंधान का विषय बन गई है और इस अनुसंधान में सबसे बड़ा शोध का विषय पीडब्ल्यूडी की कार्यपालन यंत्री, एसडीओ और साईट इंजीनियर का अनुभव तथा नीयत है? शासन के आदेश है कि जब निर्माण शुरू किया जाता है तब सबसे पहले उस निर्माण से जुड़ी हुई तमाम महत्वपूर्ण जानकारी वाला कंस्ट्रक्शन बोर्ड लगाया जाता है। बैतूल में 3 करोड़ की लागत से बन रही है इस सडक़ को लेकर कहीं पर भी कोई बोर्ड नहीं लगा है? इस बात को पूर्व में भी राष्ट्रीय दिव्य दुनिया ने उल्लेखित किया था। जब इस मामले में मीडियाकर्मी ने पीडब्ल्यूडी की कार्यपालन यंत्री प्रीति पटेल से मंगलवार को बोर्ड लगाने के संबंध में चर्चा की और पूछा तो कार्यपालन यंत्री का कहना था कि सडक़ बनने के बाद बोर्ड लगाया जाएगा पहले नहीं? इससे ही साफ नजर आता है कि प्रीति पटेल कार्यपालन यंत्री का प्रभार के योग्य नहीं है! शासन के स्पष्ट नियम है कि स्टीमेट की जानकारी देने वाला बोर्ड हर सरकारी निर्माण स्थल पर लगना चाहिए? वहीं आरोप तो यह लग रहा है कि सडक़ निर्माण में जो धांधली की जा रही है उसे छिपाने के लिए बोर्ड नहीं लगाया जा रहा है? यदि बोर्ड लगेगा तो शहर में कोई भी निर्माण संबंधी सामान्य जानकारी रखने वाला व्यक्ति सडक़ निर्माण की वास्तविकता का खुलासा कर देगा। इस सडक़ निर्माण में जहां शहर में आम जनता हैरान परेशान हो रही है वहीं इसकी गुणवत्ता और तकनीकी मापदंड पर भी प्रश्र चिन्ह लग रहा है?

- निर्माण में सात इंच का फर्मा उपयोग कर रहा है ठेकेदार...
निर्माण कार्यो से ही जुड़े कांग्रेस नेता समीर खान ने बताया कि व्हाईट टॉप सडक़ में ठेकेदार सडक़ निर्माण में जो फर्मा प्रयोग कर रहा है वह 7 इंच वाला ही है? अब ऐसे में सवाल यह है कि फिर 10 इंच मोटाई की सडक़ कैसे बन सकती है? सडक़ पर निरीक्षण करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि यह बात क्यों नहीं समझ रहे है कि ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मिलकर सडक़ का सत्यानाश कर रहे है?

- इनका कहना...
सडक़ निर्माण में बोर्ड ना लगाया जाना गंभीर मामला है और इसमें तत्काल कार्रवाई होना चाहिए। ईई द्वारा बोर्ड ना लगाने से पारदर्शिता के नियम का उल्लंघन हो रहा है।
- अभय सिंह चौहान, सिविल इंजीनियर।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 05 सितम्बर 2025