(बैतूल) फसल बीमा से किसानों का हो रहा मोहभंग हर वर्ष बीमा कराने वालों की घट रही संख्या , - वास्तव में फसल बीमा किसान की फसल का नहीं बल्कि उस पर लिए गए कर्ज का है बीमा
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2017 से लागू हुई है। यदि इस योजना में बीमा कराने वाले किसानों का ट्रेंड देखे तो यही सामने आता है कि हर वर्ष इन किसानों की संख्या घट रही है और बीमित खेत का रकबा भी लगातार घट रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि बीमा कराने वाले किसानों को यह बात समझ आ रही है कि उनके द्वारा जो बीमा कराया जाता है और जितना प्रीमियम दिया जाता है, उतना उन्हें क्लेम ही नहीं मिलता। किसानों का मानना है कि फसल बीमा योजना मूलत: कंपनी के फायदे का ज्यादा साबित हो रहा है। इसका लाभ किसानों को उतना नहीं मिलता जितना मिलना चाहिए। किसानों का कहना है कि फसल बीमा में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें इकाई पटवारी हल्के को माना गया है खेत को नहीं। वहीं दूसरा मसला यह है कि फसल बीमा क्लेम नुकसानी में तभी बनता है जब फसल अधिसूचित हो। इस स्थिति के कारण किसानों को जो वाजिब लाभ मिलना चाहिए वह फसल बीमा से नही मिल रहा है। किसानों की इस बात की पुष्टि इसी से होती है कि हर वर्ष किसानों का फसल बीमा से मोहभंग हो रहा है। जैसे खरीफ 2022-23 में 1 लाख 19 हजार 433 किसानों ने फसल बीमा कराया था। वहीं वर्ष 2023-24 में यह संख्या और कम हो गई और 1 लाख 20 हजार 31 किसानों का ही फसल बीमा हो पाया। इसी तरह यदि रबी सीजन में देख ले तो 2022-23 रबी सीजन में 80 हजार 350 किसानों ने फसल बीमा कराया था। वहीं 2023-24 में यह संख्या घटकर 77 हजार 2 74 पर आ गई।
- यदि बैंक और सोसायटी प्रीमियम ना काटे तो फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या आधी भी नहीं रहेगी...
हर वर्ष फसल बीमा को लेकर यदि देखा जाए तो व्यक्तिगत तौर पर बीमा कराने वाले किसानों की संख्या 2, 5 हजार ही रहती है। ज्यादातर उन किसानों का फसल बीमा होता है जिनका बैंक से फसल ऋण हो या सोसायटी से खाद, बीज आदि का कर्ज हो। यह बैंक और सोसायटियां ही किसानों के खातों से प्रीमियम काटकर जमा करती है। इस तरह से यह फसल का नहीं बल्कि किसान द्वारा लिए गए कर्ज का बीमा है और इसलिए जब क्लेम आता है तो वह किसान को नगद नहीं मिलता। बल्कि किसान के कर्ज में मर्ज होता है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 06 सितम्बर 2025


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