बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। सीएमएचओ कार्यालय जो कि जिले भर के स्वास्थ्य कर्मचारियों का मुख्यालय है, वहां भी अटैचमेंट का खेल खूब फल फूल रहा है! दूर दराज जाकर नौकरी करने से बचने से लेकर महत्वपूर्ण जगह पर बैठकर अतिरिक्त आय का जरिया भी यहीं से मिलता है? इसलिए यहां पर अटैच होने वालों की लंबी कतार है। वर्तमान सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाड़े से लेकर इनके पहले के सभी सीएमएचओ इस अटैचमेंट के खेल को ऑफ द रिकार्ड और ऑन द रिकार्ड दोनों तरीके से कहीं न कहीं संरक्षण देते हुए नजर आए? हालत यह है कि यदि सीएमएचओ कार्यालय के कर्मचारियों का हिसाब किताब लगाया जाए तो अधिकांश अटैचमेंट के भरोसे ही टिके हुए है? जैसे भीमपुर में पदस्थ लेखापाल राजेश आगलावे महीने में एक दो बार ही भीमपुर जाते है और इन्हें चिचोली में भी अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है? जबकि अधिकांश टाईम यह सीएमएचओ कार्यालय में ही गुजारते है और हाजरी रजिस्टर पर भी बैतूल कार्यालय में ही हस्ताक्षर करते है? इनके अलावा मुलताई से ऑपरेटर सत्यवान मेहरा, आठनेर से भीमराव लोखंडे, मलेरिया विभाग से संजय दुबे, प्रभातपट्टन से कम्प्यूटर ऑपरेटर सुनील चरडे, आमला से कम्प्यूटर ऑपरेटर अभिजीत जलतारे, घोड़ाडोंगरी से कम्प्यूटर ऑपरेटर राजकुमार साहू, शाहपुर से बीईई भगत सिंह उईके, सेहरा से भृत्य संजय गावंडे, सेहरा से वार्डबाय रामदास नागले, भैसदेही से भृत्य संजय धामने, सेहरा से भृत्य मनोहर साहू, सेहरा से वार्डबाय धनराज धुर्वे, भैसदेही से ऑपरेटर तरूण महोबे, बोरदेही से ग्रेड-3 राहुल मर्सकोले, कुष्ठ विभाग से सहायक ग्रेड-3 अंकित मर्सकोले, सेहरा से वार्ड बाय प्रकाश खातरकर और घोड़ाडोंगरी से वार्डबाय सतीश धुर्वे को सीएमएचओ कार्यालय में अटैच कर रखा है?

- केस स्टडी... अटैचमेंट से इस तरह जिला मुख्यालय पर तफरी करने मिलता है...
इसी तरह रमेश खाड़े सहायक ग्रेड-3 की पदस्थापना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमरावती घाट में है, लेकिन इन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई का प्रभारी लेखापाल बना रखा है और यह भी जिला मुख्यालय पर ही तफरी करते हुए नजर आते है? इन्हें भी सीएमएचओ कार्यालय या उसके आसपास की चाय पान की दुकान पर अक्सर देखा जाता है! ऐसे और भी कर्मचारी है जो दूरदराज की नौकरी से अटैच होकर जिला मुख्यालय पर आराम फरमा रहे है?

- सीएमएचओ साहब टालने से कुछ नहीं होगा...
इस मामले में सीएमएचओ मनोज हुरमाड़े से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि वे मीटिंग में व्यस्त है, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि इस तरह टालने से समस्या का समाधान नहीं होगा और मुद्दा तो हमेशा जिंदा रहेगा? आने वाले विधानसभा सत्र में इस पर प्रश्र भी लगेगा?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 16 सितम्बर 2025