बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा।   बैतूल जिले में ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ करने के लिए चार समूह नलजल योजना स्वीकृत की गई और टेंडर लगाए गए, लेकिन करीब ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी यह नलजल योजनाएं 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो पाई है। इन स्थितियों को देखते हुए जिले के प्रभारी मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने विगत 02 अप्रैल को आमला में समीक्षा के दौरान इन योजनाओं के ठेके ही टर्मिनेट करने के आदेश दिए थे। उनके आदेश के बाद भी जल निगम ने ठेेकेदारों को मौका दिया और ठेके निरस्त नहीं किए। नतीजा यह है कि जिस तरह की प्रोग्रेस आना चाहिए वह भी नजर नहीं आ रही है। अब जल निगम ठेका टर्मिनेट करने की बात कर रहा है। इसके लिए जल निगम के अधिकारी जिम्मेदार है। हालत यह है कि चार में से तीन नलजल योजनाएं तो 30 फीसदी से भी कम है। जब भी इस संबंध में जल निगम के अधिकारियों से बात की जाती तो उनका एक ही रटा रटाया जवाब होता था कि नोटिस दिया गया है। 

- छिंदवाड़ा में बैठकर अफसर कर रहे मॉनीटरिंग, नतीजा चारों परियोजनाओं का हुआ सत्यानाश...
बैतूल जिले में जो जल निगम समूह नल जल योजनाओं की नोडल एजेंसी है उनका बैतूल में कोई कार्यालय ही नहीं है। बैतूल जिले का पूरा कामकाज जल निगम के छिंदवाड़ा कार्यालय के पास है। यहां के अफसर महीने 15 दिन में एक बार जब समीक्षा होती है तभी आते है। 

- कलेक्टर की समीक्षा में समूह नलजल योजनाओं  की प्रोग्रेस जानकारी ही नहीं दी जाती है...
कलेक्टर, कमिश्रर और जनप्रतिनिधि जब समीक्षा करते है तो उन्हें समीक्षा में पीएचई द्वारा जो जानकारी और डेटा उपलब्ध कराया जाता है उसमें केवल एकल नलजल योजनाओं को लेकर ही जानकारी रहती है। पिछले एक वर्ष से समूह नलजल योजनाओं की जानकारी देना ही बंद कर दिया है। 

- जनप्रतिनिधियों की नासमझी का भी खामियाजा रहा इन परियोजनाओं के अधूरे रहने में...
बैतूल जिले में जो जनप्रतिनिधि योजनाओं की समीक्षा अधिकारियों के साथ करते है उनके नॉलेज और जानकारियों को लेकर वैसे ही गंभीर सवाल रहता है। यह लोग अधिकारियों द्वारा दिखाए जाने वाले आंकड़ों और लच्छेदार बातों में आकर हां में हां मिलाते है और इसी का खामियाजा है कि यह नलजल योजना अधूरी पड़ी है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 20 सितम्बर 2025