बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल जिले के स्वास्थ्य विभाग में अब आउटसोर्स से फील्ड की पोस्ट भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में जिन्हें भर्ती किया जा रहा है, उनकी योग्यता और तकनीकी कौशल का परीक्षण या मापदंड क्या होगा इसका कुछ भी स्पष्टीकरण सामने नहीं आ रहा है। आउटसोर्स से होने वाली भर्तीयों को लेकर क्या सीएमएचओ और बीएमओ निगरानी कर रहे है या नहीं यह भी बड़ा सवाल है? दरअसल बैतूल जिले में ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश फील्ड की पोस्ट इसलिए खाली पड़ी है कि जिनके पास जैक - जुगाड़ है वे मुख्यालय के आसपास या मुख्यालय पर अपना अटैचमेंट करवा लेते है! इसी अटैचमेंट की वजह से खाली पदों पर रेगुलर भर्ती करने की जगह आउटसोर्स का सहारा लिया जा रहा है? इस संबंध में 31 जुलाई 2025 को उपसंचालक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया था। इसमें से साफ लिखा था कि शासकीय चिकित्सालयों हेतु निर्धारित मापदंडों का पालन करते हुए आउट सोर्स कर्मचारियों का नियोजन दिशा निर्देश के अनुसार किया जाए। इसके लिए उन्होंने सभी जिलों में मल्टीस्कील्ड ग्रुप बी वर्कर, कम्प्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, भृत्य एवं वाहन चालकोंं की भर्ती के लिए जरूरी योग्यता के संबंध में मार्गदर्शन भी दिया है और स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से स्वीकृत पदों पर श्रम विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन किया जाए। इस व्यवस्था में अकेले शाहपुर ब्लॉक में लगभग 61 पोस्ट है। जिसमें 5 सुपरवाईजर, 28 कम्प्यूटर ऑपरेटर और 28 वार्ड बाय शामिल है। यदि पूरे जिले का हिसाब-किताब लगाया जाए तो आउटसोर्स के माध्यम से कम से कम 500 से 700 बेरोजगारों को नियुक्ति दी जा रही है। इन नियुक्तियों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन्हें रखा जा रहा है तो क्या इसके लिए आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया क्या है? मापदंड और योग्यता का परीक्षण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से किसकी जिम्मेदारी है? आउटसोर्स कंपनी श्रम विभाग के मापदंड का पालन करेगी या नहीं इसकी मॉनीटरिंग किस स्तर पर और कैसे होगी? इस तरह के सवालों के जवाब अभी तक स्वास्थ्य विभाग के सामने नहीं आए है। सामान्य तौर पर आउटसोर्स को लेकर यह आरोप लगता है कि यह बेरोजगारों का शोषण करते है और जिस विभाग में आउटसोर्स कंपनी काम करती है उसके अधिकारी इन बेरोजगारों के हितों की रक्षा करने की जगह आउटसोर्स के प्रति साफ्ट कार्नर दिखाते है और आरोप यह लगते है कि इससे इन जिम्मेदार अधिकारियों को भी कहीं ना कहीं आर्थिक फायदा होता है। अब ऐसे में सीएमएचओ के ऊपर सबकी नजर लगी है कि वे क्या कदम उठाते है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 21 सितम्बर 2025