(बैतूल) खेल सामग्री दे नहीं रहे पर खिलाडिय़ों के पदक जीतने पर शाबाशी जरूर लेंगे कोच कहार साहब , - जनजातीय कार्य के खेल विभाग में बहुत कुछ ऐसा है जो है गहन जांच का विषय
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जनजातीय कार्य विभाग आदिवासी वर्ग के खिलाडिय़ों को तरासने के लिए जिले में दो खेल हॉस्टल संचालित करता है। इन हॉस्टल में रहने वाले खिलाड़ी छात्र-छात्राओं को क्या सुविधा मिलती है और क्या नहीं इस पर कोई ध्यान नहीं देता है, लेकिन जब यह आदिवासी वर्ग के खिलाड़ी राज्य स्तरीय या राष्ट्रीय स्तरीय स्पर्धा में पदक जीतकर आते है तो कोच कहार साहब शाबाशी लेने सबसे आगे नजर आते है? यह वर्तमान में तीन भूमिका में है और तीनों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे है? इसके बावजूद लंबे समय से इन भूमिकाओं का निर्वहण करते आ रहे है? यह वर्तमान में जिस कन्या क्रीड़ा परिसर के कोच है वहां पर तीन वर्ष से खिलाडिय़ों को खेल सामग्री ही नहीं दी गई है? इस वर्ष जूड़ों के खिलाड़ी गुना में राज्य स्तरीय, ब्रास के खिलाड़ी इंदौर में राज्य स्तरीय स्पर्धा में खेलकर आ चुके है। स्थिति तो यह है कि शिल्पा जैन से लेकर विवेक पांडे तक सब जानते है, लेकिन अज्ञात कारणों से कहार साहब के क्रियाकलाप पर मौन रहते है?
- समिति का गठन लेकिन खेल सामग्री खरीदी ही नहीं गई...
खेल सामग्री के अभाव को लेकर जब डिमांड सामने आई तो वर्तमान सहायक आयुक्त ने एक क्रय समिति का गठन कर दिया। इस समिति का गठन होने के बाद भी खिलाडिय़ों को खेल सामग्री नहीं मिली है। जूड़ों के खिलाडिय़ों को जो ड्रेस मिलना चाहिए वह नहीं दी गई। वहीं साफ्ट बॉल के खिलाडिय़ों को हेलमेट, बॉल, ग्लब्स, चेस्ट गार्ड, सिलेजर आदि नहीं दिए गए, और एथलिट वालों के लिए भाला, गोला, चकती जैसी खेल सामग्री भी पर्याप्त उपलब्ध नहीं है। हाई जम्प के लिए स्टेंट नहीं है। कन्या क्रीड़ा परिसर में तो हाई जम्प और लांग जम्प और ट्रिपल जम्प के लिए फिट तक नहीं बनाई गई? यह सब उस कोच के खेल परिसर की स्थिति है जो प्रदेश और जिले का भी क्रीड़ा प्रभारी है?
- अब तक खिलाडिय़ों को नहीं दिए गए ट्रेक सूट...
सामान्य तौर पर शिक्षा सत्र की शुरूआत में ही जब खेल कैलेण्डर आ जाता है तब क्रीड़ा परिसर के खिलाडिय़ों को ट्रेक सूट दे दिए जाते है? इस बार अभी तक नहीं दिए गए है। यह खिलाड़ी बिना ट्रेक सूट के ही राज्य स्तरीय स्पर्धा तक खेलने चले गए?
- साढ़े सात सौ के बजट में डे्रस में मात्र 300 का खर्च...
गुना और इंदौर में जो खिलाड़ी राज्य स्तरीय खेलने गए उन्हें ड्रेस के लिए शासन द्वारा साढ़े सात सौ रूपए का बजट दिया गया ह? जबकि इन्हें एक टी शर्ट, एक लोअर और पीटी शूज ही दिए गए है। यदि इन तीनों सामग्री का हिसाब-किताब लगाया जाए तो 300 रूपए से ज्यादा के नहीं है। इनकी खरीदी में भी भंडार क्रय नियम का पालन नहीं हुआ है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 22 सितम्बर 2025


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