बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। निजी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षक शिक्षिकाओं का जबरदस्त शोषण होता है? बैतूल जिले में भी यह सब होता आ रहा है, लेकिन इनकी तरफ से आवाज उठाने वाला कोई संगठन भी नहीं है? वहीं ऐसा कोई फोरम भी नहीं है जहां यह शिक्षक-शिक्षिकाएं अपने साथ होने वाले शोषण को लेकर बात रख सके। इस स्थिति में सरकार जिला सत्र न्यायधीश को शिक्षकों की समस्या सुनने और निराकरण करने के लिए अधिकृत करने जा रही है। यह जानकारी गत दिनों मध्यप्रदेश के लॉ सेक्रेटरी मुकेश कुमार ने उच्च न्यायालय जबलपुर में एक जनहित याचिका में सुनवाई के दौरान दी है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेन्द्र यादव की डिवीजन बैंच को जनहित याचिका में सुनवाई के दौरान लॉ सेक्रेटरी मुकेश कुमार ने बताया कि जिला न्यायधीशों को अधिकृत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला न्यायधीशों को नोटिफाई करने के लिए प्रशासकीय स्वीकृति मांगी गई है। इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी करने की तैयारी है। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक मध्यप्रदेश में शैैक्षणिक ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हो जाता। न्यायलय ने उनके जवाब को रिकार्ड पर लेते हुए आगामी तारीख तक इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। 

- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर लगाई गई है जनहित याचिका...
बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में निजी स्कूल एवं कॉलेजों में कार्यरत स्टॉफ की समस्याओं के निराकरण के लिए ट्रिब्यूनल का गठन नहीं किया गया है। इसको लेकर जनहित याचिका लगाई है। 

- इस तरह का जिले में निजी स्कूलों में होता है शोषण...
1 - सामान्य तौर पर निजी स्कूल शिक्षकों को कलेक्ट्रेट दर पर भी मानदेय और वेतन का भुगतान नहीं करते है?
2 -  निजी स्कूल और कॉलेज में जो शिक्षक सेवाएं देते है उन्हें स्कूल या कॉलेज टाईम के अलावा अतिरिक्त कार्य भी कराया जाता है?
3 - शिक्षकों को बिना प्रक्रिया के ही स्कूल या कॉलेज संचालक अपनी मर्जी से कभी भी हटा सकते है कहीं कोई सुनवाई नहीं होती?
4 - स्कूल आरटीई और छात्रों के अभिभावकों से जितनी फीस वसूलते है उसके मुकाबले शैक्षणिक गुणवत्ता पर खर्च नहीं करते?
5 - ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय अभिभावकों से तो फीस ले ली जाती है, लेकिन शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जाता है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 24 सितम्बर 2025