(बैतूल) मध्यान्ह भोजन में ना मेन्यू का पालन हो रहा ना सेम्पल रखा जा रहा और ना चखा जा रहा , - प्रभातपट्टन ब्लॉक में फरवरी और मार्च में हुए सोशल ऑडिट में कई गंभीर इश्यू का हुआ खुलासा
बैतूल (हेडलाइन)/नवल वर्मा। सरकार की फ्लेगसिप स्कीम में शामिल मध्यान्ह भोजन को लेकर यह सामने आ रहा है कि स्कूलों में पर्याप्त व्यवस्थाओं की कमी तो है ही वहीं बच्चों को दिए जा रहे भोजन के मामले में गुणवत्ता को लेकर बनाए गए पैरामीटर का भी पालन नहीं हो रहा है यह खुलासा 14 फरवरी 2025 से 26 मार्च 2025 के दौरान पट्टन ब्लॉक की 52 शालाओं में कराए गए सोशल ऑडिट से सामने आया है। इस सोशल ऑडिट में अलग-अलग स्कूल से अलग तरह की इश्यू सामने आए है। इन इश्यू को लेकर कलेक्टर बैतूल ने बीआरएसी पट्टन को नोटिस जारी किया है और सोशल ऑडिट में सामने आए इश्यू का निराकरण जनसुनवाई से पहले करने के निर्देश दिए है। एमडीएम भोपाल के आदेश पर 20 विलेज सोशल एलीनेटर ने स्कूलों में जाकर दस्तावेज और व्यवस्थाओं के आधार पर ऑडिट किया है। वर्तमान जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन ने इस सोशल ऑडिट को बेहतर तरीके से करवाने के लिए स्वयं मॉनीटरिंग की है। यह सोशल ऑडिट एमडीएम भोपाल के आदेश पर किया गया था। बताया गया कि भविष्य में जिले के सभी ब्लॉकों में इसी तरह से सभी शालाओं के एमडीएम का सोशल ऑडिट होगा, जिससे कि मध्यान्ह भोजन स्कीम की कमियां और खामियां सामने आ सके और उन्हें दूर किया जा सके।
इस तरह की खामियां भी आई सामने
1- मध्यान्ह भोजन के लिए अनिवार्य खाद्य लाईसेंस भी नहीं लिया गया है।
2-कुछ स्कूलों में गैस चूल्हे की जगह लकड़ी पर खाना पकाया जा रहा है।
3- स्कूलों में बच्चों को ही मध्यान्ह भोजन के बाद थाली धोना पड़ रहा है।
4- स्कूलों में भोजन पकाने और परोसने के लिए पर्याप्त मात्रा में बर्तन नहीं है।
5- मध्यान्ह भोजन के पहले बच्चों की हाथ धुलाई के लिए साबून-तौलिया नहंी है।
6- नियम अनुसार मध्यान्ह भोजन के सेम्पल का संधारण नहीं किया जा रहा है।
7- मध्यान्ह भोजन के लिए बनाए गए बोर्ड पर सीएम हेल्पलाईन नंबर दर्ज नहीं है।
8- स्व सहायता समूह और क्रियान्वयन एजेंसी के मध्य एग्रीमेंट नहीं है।
9- अनाज भंडारण के लिए सही वैकेल्पिक व्यवस्था नहीं है।
10- तेल, मसाला खाद्य सामग्री खुले में रखी जाती है।
11- एमडीएम को लेकर जागरूकता नहीं है और गणमान्य मॉनीटरिंग नहीं करते।
12- स्कूलों में डाईनिंग टेबल का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
13- माता पिता रोस्टर पंजी नहीं बनाई गई और ना ही उस पर भोजन को लेकर अभिमत लिया जा रहा है।
14- ग्रामीण स्कूल कैम्पस में ही मवेशी चराते पाए गए।
15- मेन्यू चार्ट का पालन भी कई स्कूलों में नहीं किया जा रहा है।
16- एग मार्क मसालों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
17- निरंतर मॉनीटरिंग और निरीक्षण नहीं होता है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 25 सितम्बर 2025


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