बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। आमला-सारनी विधानसभा क्षेत्र के काबिल और जुझारू विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे सारनी में 660 मेगावाट की यूनिट के लिए लगातार प्रयास कर रहे है कि हर हाल में सारनी में यह यूनिट बन जाए, लेकिन जो सरकारी सिस्टम है और जो स्थितियां है उसमें अभी भी एक्सपर्ट को यह दूर की कौड़ी लगता है! खैर विधायक के प्रयास से केबिनेट से भी मंजूरी हो गई है और भेल के लिए एलओआई भी जारी हो गई है? जिस भेल को यहां पर यूनिट लगाने का काम मिला है उसको लेकर यह फैक्ट सामने आ रहे है कि उसे छत्तीसगढ़ में 11 हजार 800 करोड़ लागत की दो यूनिट लगाने का ठेका 8 माह पहले मिल चुका है, लेकिन अब तक वहां भेल ने एक पत्थर भी नहीं लगाया ?

- पहले भूमिपूजन हो चुका है इसलिए लोगों का भरोसा नहीं बैठता...
 सारनी में 660 मेगावाट यूनिट लगाने का राजनैतिक प्रयास तो पिछले 10 वर्ष से देखने में आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो विधानसभा चुनाव के पहले बकायदा यहां भूमिपूजन भी कर दिया था, लेकिन इसके बाद समय गुजरता गया और यूनिट नहीं लगी? इसलिए लोगों को लगता है कि अभी भी यह 660 मेगावाट की यूनिट दूर की कौड़ी है।

- अभी भी यूनिट की कागजी कार्रवाई में दो स्टेप होना बाकी...
सारनी में 660 मेगावाट यूनिट लगाने की जो नई कसरत हो रही है। इसमें कैबिनेट के बाद भेल के लिए एलओआई जारी हो चुकी है, लेकिन जो एक्सपर्ट है उनका मानना है कि यदि इसमें कम से कम दो स्टेप की प्रक्रिया होना बाकी है और इसमें कम से कम 7 से 8 माह का समय लग ही जाएगा। अब ऐसी स्थिति में और कितना समय लगेगा इसका आंकलन संभव नहीं।

- भेल के पास ऐसे और भी 18 यूनिट के ठेके होना बताया जा रहा...
जिस भेल को 660 मेगावाट की एलओई जारी हुई है, उसको लेकर यह तथ्य सामने आ रहा है कि इसके पास इसी तरह अलग-अलग जगह पर यूनिट लगाए जाने के ठेके है और यह भी सामने आ रहा है कि इनमें से अधिकांश जगह पर भेल अभी तक अपेक्षा अनुरूप काम को गति नहीं दे पाई और बहुत सी जगह तो भेल ने काम ही शुरू नहीं किया।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 01 अक्टूबर 2025