(बैतूल) राजस्व के नेत्रांकन में फसल क्षति 25 फीसदी से भी कम इसलिए नहीं मिलेगी कोई भी राहत , - आरोप... राजस्व के अमले और अधिकारियों ने टेबल पर बैठकर किया सर्वे..!
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल जिले में बारिश की वजह से खरीफ सीजन की फसलों को विशेषकर सोयाबीन को तगड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को शासन से किसी भी तरह की राहत या क्षतिपूर्ति नहीं मिलने वाली है? इसकी बड़ी वजह यह है कि राजस्व विभाग और कृषि विभाग ने अपने सर्वे में फसल नुकसानी को अलग-अलग हल्के में 18 से 23 फीसदी तक बताया है। जबकि राजस्व परिपत्र में 6 (4) के तहत किसानों को राहत दिए जाने के लिए कम से कम 25 फीसदी फसल का नुकसान होना अनिवार्य है। राजस्व विभाग की ही आतंरिक रिपोर्ट से यह सामने आ रहा है कि बैतूल जिले में तहसीलदारों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार फसल क्षति का प्रतिशत 25 फीसदी से कम है। राजस्व पुस्तक परिपत्र 6 (4) के प्रावधान के अनुसार राहत राशि की जानकारी निरंक है! जिले के सभी तहसीलों से फसल नुकसानी और राहत दिए जाने को लेकर जो रिपोर्ट जिला प्रशासन को दी गई उसमें कंडिकावार जानकारी निरंक भेजी गई है?
- फसल बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर 12 हजार 614 शिकायतें दर्ज...
इधर खरीफ सीजन में मानसून के कारण फसल नुकसानी में एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के फसल बीमा टोल फ्री नंबर 14447 पर कुल 12614 श्किायतें दर्ज हुई जो सोयाबीन की फसल नुकसानी को लेकर है? बीमा कंपनी के सर्वेयर द्वारा अब तक 728 शिकायतों का सर्वे किया गया है। जो शिकायतें प्राप्त हुई उसमें बैतूल तहसील से 3810, आमला से 181, आठनेर से 127, भैसदेही 4194, भीमपुर से 301, घोड़ाडोंगरी से 7, मुलताईसे 1566, पट्टन 696 और शाहपुर से 98 शिकायत है।
- किसी भी स्तर से किसानों के लिए आवाज ही नहीं उठाई गई इसलिए नुकसान...
फसल नुकसानी को लेकर किसानों ने तो जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालय पर छूटमुट प्रदर्शन किए, लेकिन इनके समर्थन में बड़े किसान संगठन और राजनैतिक दल खुलकर सामने नहीं आए और ना ही उन्होंने इस संबंध में प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया। किसानों ने बताया कि सोयाबीन की फसल 80 फीसदी से ज्यादा बर्बाद हुई है। 1 एकड़ में एक क्विंटल सोयाबीन भी नहीं निकल रही है, लेकिन इसके बाद भी राजस्व अमले ने सही आंकलन नहीं किया।
- यह है आरबीसी 6(4) और राहत का फार्मूला...
1 - फसल क्षति: प्राकृतिक आपदाओं या कीटों के कारण 50' या उससे अधिक की फसल हानि होने पर आर्थिक सहायता दी जाती है।
2 - मकान क्षति: आग, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
3 - जनहानि/शारीरिक क्षति: किसी दुर्घटना, बिजली गिरने या जानवर के काटने से हुई मृत्यु या शारीरिक अंग की हानि होने पर आर्थिक सहायता दी जाती है।
4 - अन्य क्षति: कपड़ों, बर्तनों और खाद्यान्न जैसे सामानों के नुकसान के लिए भी सहायता मिल सकती है।
5 - प्रक्रिया: प्रभावित व्यक्ति को सक्षम राजस्व अधिकारी के पास आवेदन करना होता है, जो स्थल निरीक्षण और प्रमाणीकरण के बाद इस परिपत्र के मापदंडों के अनुसार राहत राशि स्वीकृत करता है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 27 अक्टूबर 2025


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