बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। मनरेगा में ना सामग्री का भुगतान हो रहा है और ना ही मजदूरी का और ना ही कर्मचारियों के वेतन का? जबकि मनरेगा आयुक्त का दावा है कि 16 अक्टूबर को ही राशि जारी कर दी गई है। अब सवाल यह है कि मनरेगा आयुक्त ने जब राशि जारी कर दी है तो भुगतान क्यों नहीं हो रहा है? कर्मचारियों के मुताबिक तो अचानक ही मनरेगा सिस्टम में लाए गए भुगतान साफ्टवेयर एसएनए स्पर्श में यह पूरा सिस्टम उलझ गया है? पहले की व्यवस्था बंद कर दी गई है और इसलिए हर स्तर पर भुगतान नहीं हो रहा है। भुगतान ना होने के कारण मनरेगा का मैदानी अमला खासा नाराज है और अलग-अलग तरीके से अपनी नाराजगी भी जाहिर कर रहा है। मनरेगा से जुड़े पीओ, एपीओ, लेखापाल, इंजीनियर से लेकर कम्प्यूटर ऑपरेटर और रोजगार सहायक तक  चार माह से भुगतान ना होने पर पूरे सिस्टम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे है। जहां एक ओर उन्हें वेतन भुगतान नहीं हो रहा है वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत सीईओ जल गंगा संवर्धन अभियान से लेकर एक बगिया मां के नाम जैसे अभियान में प्रोग्रेस के लिए लगातार दबाव बना रहे है? पिछले दो माह से मनरेगा के इंजीनियर हड़ताल पर है, इसके बाजूवद आरईएस के इंजीनियर से वैल्यूवेशन कराकर बिल लगवाए जा रहे है और इसको लेकर भी सवाल उठ रहे है?
नए सिस्टम में तो पोर्टल पर एफटीओ ही नहीं दिखाई देता
भुगतान के लिए जनपद के माध्यम से पंचायतों द्वारा जो एफटीओ जनरेट किए जा रहे है वह अब पोर्टल पर नजर नहीं आते है। बताया गया कि एसएनए स्पर्श साफ्टवेयर की वजह से यह स्थिति बन रही है। इस साफ्टवेयर में पहले जनपद एफटीओ जनरेट करती है। फिर इसे ट्रेजरी के सर्वर पर भेजा जाता है। वहां से यह भुगतान एफटीओ ट्रेजरी के सिस्टम के अनुसार आरबीआई के सर्वर पर जाता है।
- एक बगिया मां के नाम और जल गंगा के भुगतान बाकी...
वर्तमान में बैतूल जिले में एक हजार एक बगिया मां के नाम बनाई गई है। इनमें से कुछ बगिया 100 पौधों वाली है तो कुछ 50 पौधों वाली है। इसमें पौधे, तारपोल फेसिंग, बारबेट वायर, खाद आदि का करीब एक बगिया पर 3 से 4 लाख रूपए का भुगतान होना है जो नहीं हुआ है। वहीं पूर्व में जो गर्मी में जल गंगा अभियान चलाया गया था उसका भी भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। 

- कर्मचारियों का भुगतान ना होने से बढ़ रहा है आक्रोश...
पिछले चार माह से मनरेगा से जुड़े हुए किसी भी अधिकारी, कर्मचारी को वेतन का भुगतान ही नहीं हुआ है। अकेले बैतूल जिले में करीब-करीब एक हजार से ज्यादा अलग-अलग स्तर के कर्मचारी और अधिकारी है। यह सभी लगातार इस बात को लेकर आक्रोश जाहिर कर रहे है कि उन्हें समय पर भुगतान क्यों नहीं हो रहा है। इनका कहना है कि तमाम त्यौहार तंगहाली में मनाने पड़े।

- नए-नए फार्मूले फिर भी नहीं रूकता भ्रष्टाचार...
मनरेेगा वर्ष 2006 से लागू हुआ है, लेकिन तबसे लेकर आज तक इसमें तमाम तरह के प्रयोग किए गए। जैसे एसएनए स्पर्श जैसा साफ्टवेयर लाया गया। पारदर्शिता के नाम पर इस तरह के प्रयोग के बाद भी मनरेगा में भ्रष्टाचार नहीं रूका और इसलिए आए दिन आरोप लगते है। जैसे वर्तमान अभियानों में भी आरोप लग रहे है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 29 अक्टूबर 2025