बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। विधायकों और अधिकारियों की बैठक के बाद सरकारी प्रेस रिलीज से बताया गया कि फसल नुकसानी को लेकर तीन दिन का विशेष सर्वे होगा? जब यह बात किसानों तक पहुंची तो उनकी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि क्या अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने हमें मूर्ख समझ रखा है? जब फसल बर्बाद स्थिति में खेत में थी तब सर्वे सही तरीके से क्यों नहीं कराया गया? जब प्रशासन ने 23 फीसदी से कम की नेत्रांकन रिपोर्ट बनाकर रख दी और यह बात सार्वजनिक हो गई तब जबरन वाहवाही लेने के लिए इस तरह का राजनैतिक हथकंडा अपनाया जा रहा है? किसानों का कहना है कि सोयाबीन तो पहले ही पूरी तरह से तबाह हो गई थी इसके बाद भी सर्वे में यह सामने नहीं लाया गया। पटवारी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने घर बैठकर ऐसी रिपोर्ट बनाई जिसमें नुकसानी का आंकलन कम आया? अब जब धान और मक्का भी दीपावली के दौरान हुई बारिश में कटने के बाद और उसमें दोबारा अंकुरण होने लगी है तब बताया जा रहा है कि विशेष सर्वे किया जाएगा! किसानों का कहना है कि जब खेत खाली हो गए है और किसानों ने रबी सीजन की बोवनी की तैयारी शुरू कर दी है तब इस तरह का शिगूफा छोड़ा जा रहा है? इधर किसानों का कहना है कि भावांतर में जिस तरह से बहुत कम मात्रा सोयाबीन की आ रही है उससे ही साफ हो जा रहा है कि जिले में सोयाबीन की फसल किस स्तर पर बर्बाद हुई है। राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा घर बैठकर किए गए सर्वे के कारण किसानों को फसल बीमा में भी नुकसान उठाना पड़ेगा! इसका जिम्मेदार कौन है? किसानों का कहना है कि इंडियन काफी हाउस की इडली खाने में अधिकारियों के साथ होने वाली मीटिंग से उनका भला नहीं हो सकता? क्योंकि किसी की मंशा ही ऐसी नहीं है?

@ ऑफ द रिकार्ड.... बैतूल विधायक का ट्रेंड बताता है कि यदि कोई रसगुल्ले की मांग करेगा तो वे उसे तरसा तरसाकर गुलाब जामून खिलाएंगे...
बैतूल विधायक के राजनैतिक तौर तरीकों को लेकर अच्छे से समझने वाले उनके ही समर्थक और कार्यकर्ता अब कहने लगे है कि भईया की आदत हो गई है कि यदि कोई उनके पास काम लेकर जाता है तो भईया पहले तो उसे इतना लंबे समय तक खींचते है कि सामने वाले का इंट्रेन्स ही खत्म जाए और यदि काम करते भी है तो 80 फीसदी ही करते है 20 प्रतिशत में फिर भी फंसाकर रखते है! इस स्थिति को लेकर उनके एक करीबी का कहना है कि भईया का ट्रेंड है कि रसगुल्ले की इच्छा जताओगे तो वे गुलाब जामुन खिलाएंगे।

- प्रति एकड़ 10 हजार रूपए का मुआवजा दिलवाया जाये...
जिस तरह से फसलों की स्थिति हो चुकी है उसे देखते हुए प्रत्येक किसान को आरबीसी 6 (4) के तहत 10 हजार रूपए प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाए। 
राजेश गावंडे, कांग्रेस नेता।

- इस तरह का प्रचार केवल गुमराह करने के लिए...
जब पूरा खेत खाली हो गया तब दोबारा सर्वे कराने की बात करना किसानों को गुमराह करने का काम है, इसका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है।  
- भूषण कांति, कांग्रेस नेता।