(बैतूल) भावांतर में सोयाबीन के बढ़ रहे मॉडल रेट किसानों को इससे होगा आर्थिक नुकसान , - बैतूल में पंजीयन कराने वाले किसानों की भी भावांतर में कम हो रही है रूचि
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। सरकार ने सोयाबीन में किसानों के लिए भावांतर योजना एक बार फिर लागू की है। इस योजना में जिस दिन से खरीदी चालू हुई उस दिन से लगातार मॉडल रेट बढ़ रहे है। पहले दिन मॉडल रेट 4 हजार 20 रूपए था जो अब बढ़ते हुए 4 हजार 70 रूपए तक जा चुका है। इस तरह से किसानों को हर दिन परिवर्तित होकर बढऩे वाले मॉडल रेट के कारण जो भावांतर की राशि मिलेगी उससे नुकसान होगा। सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5 हजार 328 रूपए घोषित किया है और भावांतर में जो मॉडल रेट है उसके और समर्थन मूल्य के मध्य जो अंतर आएगा उसका भुगतान किसानों को किया जाएगा। 12 नवम्बर को तो मॉडल रेट 4 हजार 77 रूपए तक पहुंच गए थे। 7 नवम्बर को पहला मॉडल रेट 4 हजार 20 रूपए प्रति क्विंटल घोषित हुआ था, वहीं 8 नवम्बर को 4 हजार 33 रूपए हुआ, इसके बाद 9 और 10 नवम्बर को 4 हजार 36 रूपए प्रति क्विंटल हो गया, और इसके बाद 11 नवम्बर को यह सीधे 4 हजार 56 रूपए पर पहुंच गया। इसके अगले दिन 12 नवम्बर को 4 हजार 77 रूपए हो गया है। मॉडल रेट जितना बढ़ता है उससे किसानों को उतना नुकसान होता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अभी हाल ही में किसानों के खाते में भावांतर की राशि डाली है। बैतूल जिले में भावांतर के तहत अब तक 411 किसानों ने ही अपनी उपज बेची है, जबकि 8 हजार 291 किसानों ने भावांतर के तहत अपना पंजीयन कराया था। किसान कांग्रेस के अध्यक्ष जगदीश कोचरे ने बताया कि भावांतर किसानों के साथ छल वाली योजना साबित हो रही है और इसलिए बैतूल जिले के किसान भावांतर में रूचि नहीं ले रहे है। वहीं दूसरी ओर एफएक्यू को लेकर भी किसानों में असंतोष है। भारतीय किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष राजेश पप्पू शुक्ला का कहना है कि बैतूल जिले में ज्यादा से ज्यादा सोयाबीन उत्पादक किसान भावांतर का लाभ ले इसलिए बैतूल विधायक और सांसद ने खरीदी में किसी भी तरह से किसानों को परेशानी ना हो इसके लिए मंडी सचिव को दिशा निर्देश दिए है।
- और इधर अचानक ठंड पड़ गया ज्वार मेंं फर्जी पंजीयन का मामला...
बैतूल जिले में भी ज्वार में भी समर्थन मूल्य में खरीदी होना है। इसके जो पंजीयन किए गए थे। जब उसका कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम के माध्यम से सत्यापन कराया गया तो करीब साढ़े ग्यारह सौ पंजीयन फर्जी पाए गए। मामला मीडिया में खासा तूल पकड़ा, लेकिन अब ठंडा पड़ गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े में समिति प्रबंधक, संबंधित पटवारी और सत्यापन करने वाले तहसीलदार पर एफआईआर होना चाहिए।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 19 नवंबर 2025


मथुरा में बाल कृष्ण के दर्शन को आए भगवान शिव, क्यों कहलाते हैं ‘शहर के कोतवाल’?
चाणक्य का बड़ा दावा—शादीशुदा ही बने शासक, तभी मजबूत होगा देश
सावधान! बच्चों के ये नाम बन सकते हैं परेशानी की वजह, जानिए क्यों