(बैतूल) पश्चिम वन मंडल में करोड़ों के फर्जीवाड़े में डीएफओ वरूण यादव और उनके तीनों यादव ऑपरेटर्स पर अभी भी लटक रही है जांच की तलवार , - जिले की जांच टीम ने तकनीकी विशेषज्ञ और समय सीमा बढ़ाने की रखी मांग
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जिले के वन विभाग के पश्चिम वन मंडल में आहरण वितरण में जो करोड़ों रूपए का घोटाला हुआ है उसकी जांच अभी बंद नहीं हुई है? बल्कि जांच टीम ने जांच के वृहद पैमाने को देखते हुए तकनीकी एक्सपर्ट की मांग करते हुए समय सीमा बढ़ाने के लिए कहा है? यह फर्जीवाड़ा स्टेट फाईनेंसियल इंटलीजेंटस सेल (एसएफआईसी) ने पकड़ा था। इसके बाद आयुक्त कोष एवं लेखा पर्यावास भवन ने इस संबंध में बैतूल कलेक्टर को विस्तृत जांच के लिए निर्देश दिए थे?
इसी जांच को लेकर कलेक्टर बैतूल ने एक टीम गठित की थी, इसमें संयुक्त कलेक्टर मकसूद अहमद, वरिष्ठ कोषालय अधिकारी मीनाक्षी डहारे, लेखा अधिकारी अशोक कुमार जावलकर, प्रभारी सहायक संचालक राजकुमार उईके को रखा गया था। जांच दल ने कलेक्टर को अंतरिम जांच प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया है, अंतरिम जांच प्रतिवेदन के साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्राप्त डाटा अनुसार 662 संदिग्ध खातों में 1808 देयकों में हुए 4040 ट्रांजेक्शन की जांच की जाना है? अत: देयक एवं देयकों की वृहदता को दृष्टिगत रखते हुए विस्तृत जांच के लिए दो माह का समय प्रदान किया जाना चाहिए, साथ ही तकनीकी बिंदुओं के संबंध में राज्य स्तर से तकनीकी विशेषज्ञोंं को जांच दल में शामिल किया जाना उचित होगा?
- कलेक्टर को सामने आकर पूरे मामले में करना चाहिए स्पष्ट...
वन विभाग की इस जांच को लेकर यह कहा जा रहा है कि कलेक्टर ने जांच से हाथ खड़े कर दिए है! यदि यह बात गलत है तो कलेक्टर को सामने आकर बताना चाहिए कि उक्त जांच को लेकर क्या स्थिति है और क्या अपडेट है? क्योंकि इस मामले को लेकर कलेक्टर की ईमानदार छवि पर लोगों को ऊंगली उठाने का मौका मिल रहा है?
- अंतरिम रिपोर्ट में यह आया सामने...
1 - पार्टी नाम अलग तथा व्हाउचर तथा खाताधारक का नाम समान?
2 - खाता धारक का नाम अलग तथा पार्टी नाम व्हाऊचर में समानता?
3 - व्हाचर में नाम अलग तथा खाताधारक एवं पार्टी के नाम में समानता?
- डीएफओ के साथ इन तीन ऑपरेटरों की भूमिका संदिग्ध...
पूरे मामले में पश्चिम वन मंडल के डीएफओ वरूण यादव और वहां पदस्थ व्यय शाखा के मूलचंद यादव, स्थापना शाखा के श्रीराम यादव और व्यय शाखा के चैतराम यादव की भूमिका संदिग्ध है। इनकी संदिग्ध कार्यप्रणाली को देखते हुए 23 अक्टूबर 2023 को तात्कालीन सीसीएफ ने इन आपरेटरों हटाए जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी इन्हें नहीं हटाया गया? इसमें से चैतराम यादव की लाईफ स्टाईल को लेकर वैसे ही चर्चा रहती है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 13 दिसंबर 2025


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