बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। इन दिनों सरकारी सिस्टम में अटेंडेंस लगाने के लिए सार्थक एप का उपयोग किया जा रहा है और इसमें जिओ टैग फोटो भी डालनी होती है। फोटो मिसमैच होने पर यह माना जाता है कि संबंधित कर्मचारी या अधिकारी अपने कार्यस्थल से गायब है? स्वास्थ्य विभाग में सार्थक एप से ही डॉक्टर्स की हाजरी लगाई जा रही है और इस एप की हाजरी के चक्कर में सीएमएचओ कार्यालय का पूरा फोकस बांड वाले डॉक्टर्स की ओर ही है? जबकि अन्य डॉक्टर्स इसके दायरे में आने से बच रहे है।  बांड वाले डॉक्टर्स एप के चंगुल में इसलिए फंस रहे है कि ज्यादातर पीएचसी और सीएचसी में नौकरी कर रहे है, अस्थाई रूप से रह रहे है। ऐसे में वे अवकाश दिनों में चले जाते है लेकिन आदेश यह है कि अवकाश दिनों में भी इन्हें फोटो पंच करना है और जब यह फोटो पंच करते है तो यह सामने आता है कि अनाधिकृत फोटो से हाजरी लगाई है। ऐसी स्थिति में बांड वाले डॉक्टरों का वेतन तक काटने की जानकारी सामने आ रही है। वैसे ही कुछ दिनों पहले यह सामने आया था कि बांड वाले डॉक्टरों को सीएमएचओ कार्यालय के सिस्टम की वजह से पांच माह से वेतन नहीं मिला था। अभी इस मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि कितनों को वेतन मिल चुका है और कितनों को अभी मिलना बाकी है? खैर बांड वाले डॉक्टर्स का कहना है कि वे पूरे समय अपनी सेवाएं दे रहे और कार्य स्थल पर ही रह रहे है, लेकिन सार्थक एप की वजह से अवकाश दिवस पर अनाधिकृत फोटो वाला ऑप्शन आ जाता है, विगत दिवस उन्होंने सीएमएचओ कार्यालय जाकर इस संबंध में अवगत भी कराया था। 

- जिला अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच होना चाहिए...
जिला अस्पताल में सीसीटीवी लगे हुए है और वहां पर ड्यूटी डॉक्टर्स अपनी कार्य अवधि कितने समय अस्पताल में मौजूद रहते है, इसकी भी जांच होना चाहिए, क्योंकि यहां पर अधिकांश डॉक्टर्स स्थाई रूप से तैनात है, इनका स्थाई निवास भी अब बैतूल हो चुका है। ऐसे में यदि यह डॉक्टर्स सार्थक एप पर हाजरी लगाकर चले जाते होंगे तो इसको एप कैसे पकड़ेगा? वैसे भी जिला चिकित्सालय में पैथालॉजी लेब को लेकर लगातार सवाल है कि यहां पर पैथालॉजिस्ट पूरे समय उपलब्ध नहीं रहते?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 19 दिसंबर 2025