बैतूल(हेडलाइन)। चुनाव के वक्त मेडिकल कॉलेज का सपना दिखाने वाले हेमंत खण्डेलवाल पर अब उसी सपने को तोड़ने का आरोप लग रहा है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निलय डागा ने आरोप लगाया कि हेमंत खंडेलवाल दगाबाज हैं। उन्होंने चुनाव के समय सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने का वादा किया था, लेकिन अब पीपीपी मॉडल लाकर उसी वादे से मुकर गए हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता के विश्वास के साथ सीधा धोखा है और इसे कभी माफ नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि यह मॉडल लागू होते ही जिले की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था निजी हाथों में चली जाएगी और सरकार की भूमिका नाम मात्र की रह जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि पीपीपी मॉडल विकास नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को खत्म करने की साजिश है।


- निजी कब्जे में जाएगा सरकारी सिस्टम...
निलय डागा ने कहा कि पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज खुलने का सीधा मतलब है कि जिला अस्पताल, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारी धीरे-धीरे प्राइवेट मैनेजमेंट के अधीन हो जाएंगे। सरकार का नियंत्रण खत्म होगा और फैसले निजी कंपनियों के हाथ में चले जाएंगे। स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा को मुनाफे के तराजू पर तौला जाएगा।


- डॉक्टर और स्टाफ की सुरक्षा खत्म...
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि पीपीपी मॉडल में सबसे बड़ा खतरा डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के भविष्य पर है। शासकीय सेवा की स्थिरता, सुरक्षा और सेवा भावना समाप्त हो जाएगी। निजी प्रबंधन में डॉक्टर कर्मचारी नहीं संसाधन बनकर रह जाएंगे, जिन पर दबाव, लक्ष्य और मुनाफे की जिम्मेदारी थोपी जाएगी। इससे इलाज की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा।


- इलाज सेवा नहीं, व्यापार बन जाएगा...
निलय डागा ने कहा कि जब अस्पताल निजी हाथों में जाता है, तो मरीज ग्राहक बन जाता है। पीपीपी मॉडल में इलाज प्राथमिकता नहीं रहेगा, बल्कि कमाई प्राथमिकता बनेगी। जांच, दवाइयां और प्रक्रियाएं जरूरत से ज्यादा थोप दी जाएंगी, जिससे आम और गरीब मरीज सबसे ज्यादा परेशान होगा।


- सरकारी संसाधन, निजी मुनाफा...
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन सरकार दे रही है, जिला अस्पताल सरकार का है, इमारत, सड़क, बिजली और पानी सरकार उपलब्ध करा रही है, फिर भी संचालन निजी हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है। निलय डागा ने कहा कि यह साफ संकेत है कि सरकार जनता के संसाधनों से निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।
- गरीब और आदिवासी होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि पीपीपी मॉडल का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को होगा। मेडिकल शिक्षा महंगी होगी, इलाज पहुंच से बाहर होगा और सरकारी व्यवस्था की जो थोड़ी बहुत संवेदनशीलता है, वह भी खत्म हो जाएगी। यह सामाजिक न्याय के खिलाफ फैसला है।


- सरकारी मेडिकल कॉलेज ही समाधान...
निलय डागा ने दो टूक कहा कि यदि सरकार वास्तव में जनता के हित में काम करना चाहती है, तो उसे शासकीय मेडिकल कॉलेज खोलना चाहिए। सरकारी मेडिकल कॉलेज से इलाज सुलभ, सस्ता और जवाबदेह रहता है। पीपीपी मॉडल में न तो पारदर्शिता होती है और न ही जवाबदेही।


- सड़क से सदन तक होगा संघर्ष...
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि पीपीपी मॉडल को वापस नहीं लिया गया, तो कांग्रेस इसे सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ बैतूल की नहीं, पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है।
निलय डागा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज निजी मुनाफे से संचालित होगा, तो वह जनता के काम का नहीं रहेगा। कांग्रेस इस फैसले का हर स्तर पर विरोध करेगी और जनता को सच्चाई से अवगत कराएगी।