बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। शहर में भू-जल को संरक्षित करने का एक बड़ा स्त्रोत काशी तालाब भी है, समय केस साथ विभिन्न कारणों से इस तालाब का आकार कुछ सिकुड़ गया है? खैर जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गर्मी में इस तालाब पर जो श्रमदान और कार्यक्रम हुआ वह सिर्फ फोटो सेशन तक सीमित रह गया? इसलिए इस तालाब की सूरत-ए-हाल नहीं बदले है? यह तालाब सदर और गंज क्षेत्र के बड़े इलाके में भू-जल को गर्मी में नीचे जाने से रोकता है और इसी वजह से कई घरों में बोरवेल पानी उगलते है। इसके बाद इसका गहरीकरण करने और इसे संरक्षित करने को लेकर कभी कोई ठोस प्रयास ही नही हुआ। जहां प्रशासनिक रूप से इस तालाब को नजर अंदाज किया जाता है वहीं सामाजिक और धार्मिक संगठन इस तालाब को लेकर केवल इतना मतलब रखते है कि इसके आसपास  बेशकिमती जमीन है।

- ट्रायल के बाद लाखों रूपए का फव्वरा तालाब से नदारद हो गया...
सितम्बर माह में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार काशी तालाब में एक फव्वारा लगाया गया था, जिसका दो-तीन बार ट्रायल किया गया, लेकिन बाद में यह बंद हालत में रहा? फव्वारे के आसपास का क्षेत्र जर्जर हालत में है और बारिश के पानी में फव्वारा ही डूब गया था? आरोप यह लगते है कि फव्वारा आदि केवल इसलिए लगाए जाते है कि इसमें संबंधित अपनी स्वार्थ सिद्धी कर सके? काशी तालाब का फव्वारा इसी बात का सबसे बड़ा प्रमाण है? इस तालाब की कोई सुध नहीं लेता?

- स्व. लेखचंद यादव के बाद किसी ने भी तालाब के लिए आवास नहीं उठाई...
 भाजपा के एक युवा नेता थे स्व. लेखचंद यादव वे अपने सार्वजनिक जीवन के शुरूआती दौर में युवा एकता मंच नाम से एक संगठन चलाते थे और इस संगठन के माध्यम से वे इस तालाब के जीर्णाेद्वार, सौन्द्रीयकरण, गहरीकरण और इसे अतिक्रमण मुक्त किए जाने को लेकर वर्ष 2010-11 में सतत् आंदोलन करते रहे थे, आज जो थोड़ा बहुत बदलाव यहां नजर आता है तो उसका श्रेय लेखचंद यादव को ही जाता है। 

- इनका कहना...
बैतूल में जल संरचनाओं के संरक्षण को लेकर कोई सोच ही नहीं है, प्रशासनिक स्तर पर तो केवल वही काम होता है जिसमें उन्हें कमीशन मिले पर आम जनता भी जागरूक नहीं है। 
अरविंद बंटी राठौर, सामाजिक कार्यकर्ता।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 29 दिसंबर 2025