(बैतूल) सरकारी विभाग ही शासन को लगा रहे है रायल्टी में करोड़ों रूपए का चूना , - सरकारी विभागों में महज जनजातीय कार्य और नगरपालिकाओं ने ही रायल्टी की जमा, - अधिकांश विभाग और निर्माण एजेंसियों ठेकेदारों से जमा नहीं करा रही रायल्टी
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल जिले में जल संसाधन, पीएचई, पीडब्ल्यूडी, पीआईयू, नगरपालिकाएं, हाउसिंग बोर्ड, प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ सहित अनेक निर्माण एजेंसियां जो करोड़ों रूपए का निर्माण कार्य करा रही है, शासन के नियम अनुसार इन एजेंसियों को गौण खनिज में ठेकेदार से रायल्टी काटकर शासन के खाते में जमा कर रायल्टी क्लिीयरेंस का सर्टिफिकेट खनिज विभाग में जमा कराना चाहिए, लेकिन पिछले दो वर्ष का यदि रिकार्ड चेक किया जाए तो कुछ चुनिंदा विभाग ही इस नियम का पालन कर रहे है, बाकी खनिज विभाग को सूचना तक नहीं दे रहे है? जबकि करीब 6 माह पहले खनिज अधिकारी ने लगभग एक दर्जन से ज्यादा निर्माण एजेंसी और विभागों को बकायदा सूचना पत्र जारी कर रायल्टी जमा कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी इन विभागों ने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई, इससे शासन को अरबों रूपए के राजस्व का नुकसान होना बताया जा रहा है / कहा जा रहा है कि संबंधित विभाग ठेकेदारों से रायल्टी जमा ही नहीं कराते और उनके बिल निकाल देते है। इस वजह से खनिज विभाग को रायल्टी क्लिीयरेंस उपलब्ध नहीं कराते है। पूर्व में इस संबंध में एक विभाग को लेकर विधायक महेन्द्र सिंह चौहान ने एक प्रश्र भी लगाया था, लेकिन विभाग द्वारा जो जवाब दिया गया था वह संतोषजनक नहीं था। इससे सिद्ध होता है कि विभागों में बैठे अधिकारी ठेकेदारों के हित में शासन को राजस्व का नुकसान करवा रहे है? ऐसी स्थिति में कलेक्टर को रायल्टी क्लिीरेंस को लेकर खनिज विभाग से प्रतिवेदन लेकर इसे टीएल में रखना चाहिए जिससे कि हर हफ्ते इसकी समीक्षा हो और विभाग प्रमुख सजग हो?
- यह है सरकारी विभागों की रायल्टी क्लिीरेंस की स्थिति...
वर्ष 2024-25 : 4 करोड़ 55 लाख 79 हजार 70 रूपए रायल्टी के रूप में विभागों द्वारा जमा कराए गए, इसमें पीडब्ल्यूडी ने 1 करोड़ 80 लाख 68 हजार 490 रूपए, प्रधानमंत्री ग्रामीण पीआईयू-1 30 लाख 25 हजार 98 और जीएमएमपीआरआरडीए ने 1 करोड़ 4 लाख 68 हजार 308 रूपए जमा कराए। वहीं वर्ष 2025-26 में 20 लाख 25 हजार 278 रूपए जमा हुए। इसमें सहायक आयुक्त और सीएमओ ने यह राशि जमा की है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 30 दिसंबर 2025


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