बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। जिले में दो बड़ी नलजल परियोजनाएं जिनके टेंडर अभी हाल ही में निरस्त किए गए है। उसमें अभी एक ओर तकनीकी पेंच नजर आ रहा है। इन नलजल योजनाओं की पाईपलाईन बिछाने और इंटकवेल आदि बनाने में वन भूमि का उपयोग किया जा रहा है। जबकि इसके लिए जल निगम द्वारा किसी भी स्तर पर कोई वैधानिक अनुमति नहीं ली है। बताया जा रहा है कि इसको लेकर जल निगम के प्रबंध संचालक ने वीएस चौधरी कोलमानी ने एफएआर (वन अधिकार अधिनियम) से रास्ता निकालने की कोशिश की है। वैसे नियमों के जानकार मानते है कि वन भूमि वाले मसले का समाधान वन अधिकार अधिनियम के माध्यम से नहीं किया जा सकता है। पूर्व में घोघरी जलाशय में सिंचाई परियोजना में भी वन भूमि का मसला सामने आया था। जल संसाधन के अधिकारियों ने ऑफ द रिकार्ड तरीके से इसका समाधान निकाला।

- जल निगम ने परिवेश पोर्टल पर प्रस्तुत किए आवेदन...
जल निगम ने वन विभाग के परिवेश पोर्टल पर मेंढा समूह जल प्रदाय योजना के लिए 8.8411 हेक्टेयर एवं घोघरी समूह जल प्रदाय योजना के लिए 5.28 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर 27 जुलाई 2024 को अपना आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें अभी सैंद्धातिक स्वीकृति की प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है।
विलंब को लेकर प्रबंध संचालक ने जाहिर की अपना नाखुशी
बताया गया कि प्रबंध संचालक जल निगम वीएस र्चाैधरी ने कलेक्टर बैतूल और अध्यक्ष जल एवं स्वच्छता मिशन बैतूल को सैंद्धातिक सहमति हो रहे विलंब को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि सैंद्धातिक स्वीकृति में एफएआर वन अधिकार अधिनियम प्रमाण पत्र आवश्यक होता है, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि इसमें दो-तीन माह का समय जबरन लगाया जाता है। इससे योजना में विलंब होता है।
 

- विशेष ग्राम सभा का सुझाव...
प्रबंध संचालक ने कलेक्टर को सुझाव दिया है कि 26 जनवरी को होने वाली ग्राम सभा में एफएआर को लेकर प्रस्ताव लिया जाए जिससे कि सैंद्धातिक सहमति प्राप्त हो सके।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 04 जनवरी 2026