(बैतूल) मनरेगा में दो माह से मजदूरों को भी नहीं हो रहा भुगतान, इस पर समीक्षा ही नहीं होती , - अधिकारी प्रगति के लिए मैदानी अमले पर दबाव बनाते है, लेकिन व्यवहारिक समस्या नहीं सुनते
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। अभी हाल ही में कलेक्टर ने ग्रामीण एवं पंचायत स्तर पर योजना और सेवाओं को लेकर समीक्षा की? इस समीक्षा में उन्होंने तमाम योजनाओं की समीक्षा की, लेकिन मनरेगा में प्रगति के लिए सबसे ज्यादा जरूरी और मनरेगा कानून के तहत मजदूरी भुगतान को लेकर ना तो चर्चा की और ना ही समीक्षा की? स्थिति यह है कि विगत दो माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है? ऐसी स्थिति में योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए मजदूर काम पर नहीं आ रहे है? वहीं दूसरी ओर मैदानी अमले पर दबाव बनाया जा रहा है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के पहले मनरेगा में लेबर बजट खत्म करें? वर्तमान में करीब 75 से 80 फीसदी ही लेबर बजट पूरा हो पाया है। मैदानी अमले का कहना है कि समय पर मजदूरी ना आने से मजदूर काम पर नहीं आते है? उनका कहना है कि यदि समय पर भुगतान हो तो ही दबाव बनाया जाना बेहतर होगा?
सिर्फ एक बगिया मां के नाम में सामग्री का भुगतान
सामग्री के भुगतान को लेकर भी यह स्थिति सामने आ रही है कि पूर्व में पंचायतों ने निर्माण कार्यो के लिए जो सामग्री ली थी और बिल लगाए थे उसका भुगतान नहीं हो रहा है? वर्तमान में केवल जिले की सभी 10 जनपद में जो 100-100 एक बगिया मां के नाम बनाई गई है सिर्फ उसमें ही भुगतान हो रहा है।
- अमले को भी वेतन का ठिकाना नहीं...
01 अप्रैल से मनरेगा जी-रामजी हो जाएगी? वहीं जो अमला कार्यरत है उसे 6 माह में पिछले माह वेतन मिला और इस माह अभी तक भुगतान नहीं हुआ है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 24 जनवरी 2026


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