बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। विधानसभा चुनाव 2018 के कुछ माह पहले ही बड़े धूमधाम से करोड़ों रूपए से लागत से चार मध्यम आकार के जलाशयों का भूमिपूजन तात्कालिन भाजपा विधायक हेमंत खण्डेलवाल, चन्द्रशेखर देशमुख आदि ने किया था। उस समय जो वर्कआर्डर जारी हुआ था उसके अनुसार रबी 2022 में यह डेम पूरे होकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने वाले थे, लेकिन स्थिति यह है कि 2022 से 2026 आ गया लेकिन अभी तक यह डेम अधिकारिक रूप से सिंचाई के लिए अपनी क्षमता के अनुरूप पानी उपलब्ध कराने में नाकाम है। इन जलाशयों के निर्माण की सुस्त रफ्तार और लेटलतीफी को लेकर अब जरूर भाजपा विधायक अधिकारियों की बैठक में सवाल उठा रहे है? सिंचाई मंत्री के सामने अपने तथ्य रख रहे है, लेकिन सच्चाई यह है कि चार में से कम से कम दो डेम अभी और लंबे समय तक सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हो पाएंगे?

-एक ही निर्माण कंपनी के पास है चारों डेम का काम...
बैतूल जिले में इन चार लघु मध्यम परियोजनाओं के निर्माण का काम एक ही ठेका कंपनी के पास बताया जा रहा है। इस ठेका कंपनी ने पूर्व में पारसडोह जलाशय का निर्माण किया है। यह निर्माण लगभग समय सीमा में कर लिया गया था, लेकिन यह चारों परियोजनाएं काफी लंबित हुई है? बताया गया कि बैतूल के प्रभारी मंत्री का भी इस ठेका कंपनी से कोई कनेक्शन है और इसलिए इन पर किसी का कोई जोर नहीं चलता?
 
- इस तरह समझे लेटलतीफी...
1. घोघरी डेम :- घोघरी डेम की लागत 31886 लाख है। इसे प्रशासकीय स्वीकृति 4 सितम्बर 2018 को मिली थी। इसकी क्षमता 11 हजार 987 हेक्टेयर में है। सरकारी रिकार्ड के अनुसार जनवरी तक इसका 100 फीसदी काम बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि 30 मार्च को टेस्टिंग भी होगी।
2. गढ़ा जलाशय :- इसकी लागत 30752 लाख है। इसकी प्रशासकीय स्वीकृति 2 जून 2018 को हुई थी। अब इसे 21 जुलाई 2026 को पूर्ण किया जाना बताया जा रहा है। 
3. मेंढा जलाशय :- इसकी लागत 26871 लाख है और यह 4 अक्टूबर 2018 को स्वीकृत हुई। जल संसाधन विभाग के अनुसार 30 जून 2026 को पूरी हो जाएगी।
4. वर्धा जलाशय :- इसकी लागत लगभग 180 करोड़, 5500 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और दावा है कि यह सिंचाई के लिए पानी दे रहा है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 13 फ़रवरी 2026