बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। कैग की जो रिपोर्ट सामने आई है उसमें अवैध कालोनियों के लिए टीएनसीपी को जिम्मेदार ठहराया गया? यह स्थिति बैतूल जिले में भी है यहां पर भी टीएनसीपी आंख बंद कर अनुज्ञाएं जारी करती है? हालत यह है कि टीएनसीपी में कोई भी ऐसा कोई जिम्मेदार नहीं है जो मौके पर जाकर स्थल निरीक्षण करने के बाद कालोनी के लेआउट को वैरीफाई करें? महज एक कम्प्यूटर ऑपरेटर पूरी टीएनसीपी को चला रहा है और बैतूल के तमाम वैध, अवैध कालोनाईजर के लिए यही कम्प्यूटर ऑपरेटर किसी भगवान से कम नहीं है! बताया गया कि बैतूल टीएनसीपी से ऐसे लेआउट को मंजूरी दे दी जाती है जिसमें हाई टेंशन लाईन गुजरती है और अनुज्ञा के लिए इस जानकारी को छिपा लिया जाता है? टीएनसीपी की एक और कारस्तानी यह है कि जिन शर्तो के तहत वह अनुज्ञा जारी करती है उसका परिपालन हुआ है या नहीं इसको लेकर कभी देखा नहीं जाता? कैग ने भी इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है, कढ़ाई में एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए जो अनुज्ञा टीएनसीपी ने जारी की थी उसकी शर्तो में स्पष्ट लिखा था कि कितनी चौड़ाई का किस तरह का पहुंच मार्ग होना अनिवार्य है, लेकिन सच्चाई यह है कि उस प्रोजेक्ट की ड्राईंग डिजाईन में ही कोई सडक़ नहीं है? बैतूल टीएनसीपी ही यह चमत्कार कर सकती है कि जितनी भूमि की रजिस्ट्री है उससे करीब तीन गुना अधिक जमीन पर अनुज्ञा प्रदान कर दें? बैतूल टीएनसीपी को लेकर आरोप लगते रहे है कि यहां सेवा शुल्क प्रति एकड़ तय है और उसके आधार पर धड़ाधड़ अनुज्ञा दे दी जाती है? टीएनसीपी में कुछ सफेदपोश दलालों की घुसपैठ भी मानी जाती है और इनके एक इशारे पर कमर्शियल बिल्डिंग परमिशन से लेकर मल्टी स्टोरी आवासी बिल्डिंग और कालोनियों को आंख बंद कर अनुज्ञा दी जाती है? 

- उपसंचालक की जरूरत ही नहीं ऑपरेटर ही सब संभाल ले रहा...
इधर बैतूल में जिस उपसंचालक को जिम्मेदारी दी गई उनके पास पड़ोसी जिले की भी जिम्मेदारी है। बैतूल वे कब आते है और कब जाते है इसकी कोई जानकारी किसी को नहीं मिलती, करीब एक वर्ष पहले क्रेडाई बैतूल ने मांग भी की थी कि उपसंचालक की बैतूल उपस्थिति के तीन दिन निर्धारित किए जाए। टीएनसीपी का ऑफिस ऐसी जगह है कि मीडिया भी वहां ध्यान नहीं दे पाती है? इसका पूरा फायदा उपसंचालक को मिलता है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 22 फ़रवरी 2026