(बैतूल) कैशलेस स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी धारक से भी नगद राशि जमा करवा लेते है डॉ. श्याम सोनी..! - इलाज करा चुके पॉलिसीधारक ही बता रहे है अस्पताल की कारगुजारियां..?
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। केशलेश स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने वाले अनेक लोगों ने बताया कि डॉ. श्याम सोनी के सीम्स हॉस्पिटल में स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी धारक की जेब काटने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाता है? पॉलिसी धारक से नगद राशि वसूल कर ली जाती है, जबकि कायदे से भर्ती होने के बाद पॉलिसी धारक से एक रूपया भी नहीं लिया जाना चाहिए, पूरा बिल बीमा कंपनी चुकाती है। डॉ. श्याम सोनी के हॉस्पिटल में कैशलेस बीमा पॉलिसी का भी दुरूपयोग किया जा रहा है? एक मरीज ने राष्ट्रीय दिव्य दुनिया समाचार पत्र को शपथ पत्र देकर नाम ना उजागर करने की शर्त पर बताया कि बीमा कंपनी से बीमा कंपनी से अप्रूवल मिलने के बाद भी डॉ. श्याम सोनी के हॉस्पिटल में उनसे इलाज शुरू करने के पहले मोटी रकम जमा करवाई गई ? जब उन्होंने इस संबंध में आपत्ति ली तो उनसे कहा गया कि उनसे नगद लिए रूपये वापस कर देते हैं? उन्होंने बताया कि बीमा कंपनी जो भुगतान करती है वह पर्याप्त नहीं होता इसलिए मरीज से नगद पैसे लिए जाते हैं?
- बड़ा सवाल... बिना एमडी पैथालॉजिस्ट के आखिर सीम्स हॉस्पिटल में मरीजों का बीमा क्लेम कैसे स्वीकृत हो रहा?
कैशलेस स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में मरीज की किसी भी पैथालॉजी जांच के लिए यह बेहद जरूरी है कि जो भी जांच रिपोर्ट लगाई जाए वह अधिकृत एमडी पैथालॉजिस्ट से वेरीफाई और उनके हस्ताक्षर वाली होना चाहिए? अब जब डॉ श्याम सोनी के हॉस्पिटल में कोई भी एमडी पैथालॉजिस्ट पदस्थ नहीं है और फुल टाईम उपलब्ध भी नहीं रहता, तब बीमा कंपनी में पैथालॉजी रिपोर्ट कैसे मान्य हो रही?पैथालॉजिस्ट उपलब्ध नहीं रहता इसका प्रमाण अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज से भी मिल जाएगा। जिस तरह के आरोप और सवाल सामने आ रहे है उनको लेकर डॉ. श्याम सोनी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन उनका कोई भी प्रतिउत्तर सामने नहीं आ रहा है।
@ एक्सपर्ट की राय... यह बीमा कंपनी के नियमों और पॉलिसीधारक के साथ धोखाधड़ी है और इसमें एफआईआर बनती है
- एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी से जुड़े सीनियर एडवाजर का कहना है कि पॉलिसी धारक व्यक्ति जब हॉस्पिटल में कैशलेस अथवा उपचारार्थ भर्ती होता है, तभी कंपनी द्वारा प्री अप्रूवल प्रदान कर दिया जाता है और एक टोकन राशि संबंधित हॉस्पिटल के खाते में समायोजित कर दी जाती है और जब तक मरीज वहां भर्ती रहता है तब तक के अंतिम बिल का संपूर्ण भुगतान भी बीमा कंपनी द्वारा फुल एण्ड फाईनल सेटलमेंट करके बकायदा हॉस्पिटल के खाते में जमा करा दिया जाता है एवं इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी कंपनी द्वारा मरीज अथवा मरीज के परिजनों को भी उपलब्ध कराए गए मेल पर भेज दी जाती है। साथ अंतिम भुगतान से पूर्व बीमा कंपनी संबंधित हॉस्पिटल द्वारा उपलब्ध कराए गए समस्त बिल, व्हाउचर एवं रिपोर्टस को चेक भी करती है? यहां यह समझ से परे है कि जिस सीम्स पैथालॉजी लैब में पैथालॉजिस्ट एम.डी. डॉक्टर कार्यरत नहीं होने पर भी इस लैब की जांच रिपोर्ट किस आधार पर अप्रूव हो रही है?
- नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 25 फ़रवरी 2026


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