(बैतूल) 27 करोड़ के कर्ज में दबी पंचायतों पर लेबर बजट 100 फीसदी पूरा करने का है दबाव , - जिन पंचायतों में पिछले 15 दिनों में मानव दिवस जनरेट नहीं हो रहे उनकी होगी पेशी
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। टॉप पर बैठे अधिकारी अपना प्रदर्शन बेहतर दिखाने के लिए मैदानी अमले पर जमकर दबाव बनाते है और इसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते है, वित्तीय वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो रहा है और पंचायतों पर लेबर बजट का 100 फीसदी हासिल करने के लिए भारी दबाव है। यह मॉनीटरिंग की जा रही है कि किस पंचायत में लेबर नहीं चल रहे है और जिनके यहां लेबर नहीं चल रहे है उन्हें जनपदों द्वारा नोटिस थमाए जा रहे है। वही दूसरी ओर पंचायतों की तकलीफ यह है कि मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है इसलिए मजदूर नहीं आ रहे है, वहीं निर्माण कार्यो के लिए सामग्री नहीं मिल रही क्योंकि वेंडर का सामग्री का कर्जा भी चढ़ा हुआ है। जिले की सभी पंचायतों को मिलाकर सामग्री और मजदूरी का तकरीबन 27 करोड़ का कर्ज बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जिले में करीब 93 फीसदी लेबर बजट का टारगेट पूरा कर लिया है और 15 दिन में बाकी का करना है।
- एक बगिया मां के नाम की वजह से सामग्री का कर्ज बढ़ा...
एक बगिया मां के नाम स्कीम में हर जनपद में जो 100-100 बगिया का टारगेट पूरा करवाया गया उसकी वजह से सामग्री का भुगतान सर्वाधिक बताया जा रहा है, कहा जा रहा है कि इस स्कीम में करीब 25 फीसदी ही भुगतान हुआ है।
- जीरो मानव दिवस वाली पंचायतों की होगी जिला पंचायत में पेशी...
हर जनपद में ऐसी पंचायतों को चिन्हित किया गया है जहां 1 मार्च से 16 मार्च तक एक भी मस्टर जनरेट नहीं हुआ है और यहां मजदूरी में जीरो मानव दिवस है। ऐसी पंचायतों को जनपदों द्वारा जिपं सीईओ के सामने पेशी के नोटिस दिए जा रहे है।
- टारगेट पूरा करने का पूरा प्रेशर जीआरएस तबके पर ही आता है...
पंचायती राज का जो सिस्टम है उसमें यदि वाहवाही कोई लेगा तो वह जिला पंचायत सीईओ होगा और यदि किसी को प्रेशर झेलना है तो मनरेगा में सबसे छोटा कर्मचारी जीआरएस है। प्रेशर झेलने के बाद भी 4 माह से वेतन नहीं मिला।
- इस तरह से पंचायतों पर है 27 करोड़ का कर्ज...
जिले की 556 पंचायतों में जो स्थिति है उसमें 27 करोड़ 41 लाख 13 हजार रूपए का कुल कर्ज बताया जा रहा है। इसमें से मजदूरी का 1 करोड़ 36 लाख वहीं सामग्री का करीब 24 करोड़ 46 लाख रूपए और 68 लाख 52 हजार रूपए की देनदारी बाकी है। बताया गया कि वेंडर के बिल लगाए जा चुके है, लेकिन लंबे समय से भुगतान ही नहीं हो रहा है। सामग्री में सबसे ज्यादा कर्ज भीमपुर जनपद का बताया जा रहा है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 17 मार्च 2026


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